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Ichigo Ichie: परफेक्ट पार्टनर की तलाश छोड़िए, पहले समझिए इस जापानी फिलॉसफी का मतलब

इचिगो इचिए कहता है कि किसी भी रिश्ते की शुरुआत का सबसे खूबसूरत हिस्सा वही होता है, जब दोनों लोग बिना किसी दिखावे के एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं।

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डेटिंग की दुनिया में फिर से चर्चा में है जापान का Ichigo Ichie (Photo: iStock)

Ichigi Ichie: आज की डेटिंग पहले से कहीं ज्यादा अलग है। परफेक्ट पार्टनर की तलाश ने कई बार लोग उलझा हुआ महसूस करने लगते हैं। रिश्ते बनने से पहले ही टूट जाते हैं। ऐसे में जापान की एक पुरानी फिलॉसफी फिर से चर्चा में है। इस फिलॉसफी को इचिगो इचिए (Ichigo Ichie) कहा जाता है। यह रिश्तों को देखने का नायाब नजरिया है।

क्या है इचिगो इचिए?

जापानी भाषा के इस शब्द का अर्थ है- हर मुलाकात जीवन में केवल एक बार होती है। इस फिलॉसफी के अनुसार, कोई भी पल या मुलाकात दोबारा बिल्कुल उसी रूप में वापस नहीं आती। इसलिए हर बातचीत, हर डेट और हर रिश्ते को पूरी ईमानदारी और मौजूदगी के साथ जीना चाहिए। डेटिंग में इसका मतलब है कि सामने वाले व्यक्ति से मिलते समय भविष्य की अनावश्यक चिंताओं या उम्मीदों में खोने के बजाय उस पल को पूरी तरह से जिया जाए।

डेटिंग को क्यों बना सकता है आसान?

आज बहुत से लोग पहली ही मुलाकात में यह तय करने लगते हैं कि क्या यही उनका जीवनसाथी होगा। कई लोग बातचीत शुरू होने से पहले ही सामने वाले का मूल्यांकन करने लगते हैं। इचिगो इचिए इस सोच को बदलने की बात करता है। यह कहता है कि हर मुलाकात का उद्देश्य शादी या लंबे रिश्ते तक पहुंचना जरूरी नहीं है। कुछ मुलाकातें सिर्फ आपको कुछ नया सिखाने, बेहतर इंसान बनाने या एक अच्छा अनुभव देने के लिए भी होती हैं। जब अपेक्षाओं का बोझ कम होता है, तो बातचीत अधिक सहज और वास्तविक हो जाती है।

लगातार नए लोगों से मिलना, रिजेक्शन झेलना और सही साथी की तलाश कई लोगों को इमोशनली थका देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हर डेट को किसी एग्जाम की तरह देखने के बजाय एक अनुभव की तरह लिया जाए, तो मानसिक दबाव काफी कम हो सकता है। इचिगो इचिए इसी सोच को बढ़ावा देता है। यह हमें वर्तमान में रहने और हर मुलाकात का आनंद लेने की सीख देता है।

रिश्ते में 'प्रेजेंस' क्यों है जरूरी?

कई बार लोग डेट पर होते हुए भी पूरी तरह मौजूद नहीं होते। उनका ध्यान मोबाइल, पिछले रिश्तों या भविष्य की योजनाओं में उलझा रहता है। इचिगो इचिए कहता है कि किसी भी रिश्ते की शुरुआत का सबसे खूबसूरत हिस्सा वही होता है, जब दोनों लोग बिना किसी दिखावे के एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं। अगर उस पल को पूरी तरह जिया जाए, तो रिश्ता ज्यादा स्वाभाविक बनता है।

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इस फिलॉसफी की सबसे खास बात यह है कि यह सफलता को केवल रिश्ते के बनने से नहीं जोड़ता। अगर कोई मुलाकात आगे नहीं बढ़ती, तब भी उसे असफल नहीं माना जाता। वह अनुभव, सीख और मेमोरी के रूप में हमेशा आपके साथ रहती है। यही सोच इंसान को निराशा से बचाती है और उसे नए लोगों से मिलने के लिए खुला रखती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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