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जरूरी नहीं पति की हर बात मानना, बनाए इन 6 बातों का दबाव तो तुरंत करें इनकार

शादी ब्याह में सहमति जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी असहमति भी है। अपनी बात कहना, अपनी जरूरतों को व्यक्त करना और किसी बात पर अलग राय रखना रिश्ते को कमजोर नहीं बनाता।

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हमेशा पति को ना मानें परमेश्वर (Photo: iStock)

भारतीय पारंपरिक समाज में लड़कियों को हमेशा ये सिखाया जाता है कि पति परमेश्वर है और उसकी हर बात माननी चाहिए। हालांकि बहुत सी लड़कियों ने इस रूढ़ीवादी सोच को दरकिनार किा है। वैसे भी बदलते समय के साथ ये बात भी साबित हुई है कि एक सफल शादी वह नहीं है, जहां एक व्यक्ति हमेशा फैसले ले और दूसरा केवल सहमति जताता रहे। एक मजबूत रिश्ता वह है, जिसमें दोनों की राय, पसंद और असहमति को बराबर महत्व दिया जाए।

रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स और मैरिज काउंसलर्स हमेशा लड़कियों को ये सलाह देते हैं कि जरूरी नहीं कि पति की हर बात मानी जाए। उनके मुताबिक इन सात बातों से हर पत्नी को इनकार कर देना चाहिए:

करियर या पैशन को छोड़ने को कहे

अगर शादी के बाद आपसे नौकरी छोड़ने, पढ़ाई बीच में छोड़ने या अपने सपनों को त्यागने के लिए कहा जा रहा है, तो आप आपत्ति जताएं। दरअसल ये ऐसा फैसला है जो सिर्फ आप और आप ले सकती हैं।

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जिम्मेदारी अकेले उठाने को कहे

अगर आपसे कहा जाए कि बच्चों की देखभाल, घर के काम और रिश्तों को संभालने की पूरी जिम्मेदारी केवल आप ही निभाएं, तो तुरंत मना कर दें।

अपनों से दूर होने को कहे

अगर आपका पति आपको आपके पुराने दोस्तों और प्रिय लोगों से दूर होने को कहे तो, तो इसे भी तुरंत ना मान लें। विचार करें कि क्या ये उचित है।

जरूर फैसलों में चुप रहने को कहे

पैसों से जुड़े फैसले हों, बच्चों की शिक्षा का सवाल हो या भविष्य की योजनाएं..अगर ऐसे जरूरी फैसलों में आपसे चुप रहने को कहा जाए तो ना मानें उनकी बात।

जब आप पर अपनी मर्जी थोपे

अगर आप पर अपनी मर्जी थोपी जाए तो भी ना मानें। मसलन, अगर पति ही हर बार तय करे कि तुन्हें क्या पहनना है, किससे बात करना है, क्या खाना है..तो यहां आपका आवाज उठाना जरूरी है।

अगर अपमानित करे

अगर पति आपको अपसभ्द कहे या फिर किसी के भी सामने अपमानित कर और ये उम्मीद भी कर कि आप सब सहें, तो तुरंत अपनी आवाज बुलंद करें।

असहमति शादी को कमजोर नहीं करती

विवाह में सहमति जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी असहमति भी है। अपनी बात कहना, अपनी जरूरतों को व्यक्त करना और किसी बात पर अलग राय रखना रिश्ते को कमजोर नहीं बनाता। यह बताता है कि रिश्ता दो बराबर व्यक्तियों के बीच है, जहां दोनों की आवाज सुनी और समझी जाती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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