Improve Personality: रवि एक बड़ी कंपनी में काम करता था। पढ़ाई में अच्छा था, काम भी ठीक करता था, लेकिन फिर भी उसे अक्सर लगता था कि लोग उसे उतनी गंभीरता से नहीं लेते जितना उसके साथ काम करने वाले दूसरे लोगों को लेते हैं। मीटिंग में उसकी बातें अनसुनी रह जाती थीं। नए लोगों से बात करने में वह झिझकता था। कई बार तो ऐसा भी होता कि उसके बाद बोलने वाला व्यक्ति वही बात दोहरा देता और तारीफ उसे मिल जाती।
एक दिन उसने अपने सीनियर से पूछ ही लिया कि सर, मुझमें ऐसी क्या कमी है जो मैं आगे नहीं बढ़ पा रहा हूं। इस पर सीनियर मुस्कुराए और बोले, कि कमी तुम्हारे ज्ञान में नहीं है रवि, तुम्हारी प्रेजेंटेशन में है। बस यही चीज तुमको आगे नहीं बढ़ने दे रही है।
यह बात रवि के मन में बैठ गई और उसने खुद पर काम करना शुरू किया। ज्यादा कुछ नहीं, लेकिन रोज 5 मिनट के लिए खुद को सुधारने पर ध्यान दिया। फोकस रंग लाया और रवि के काम को जल्दी ही नोटिस किया जाने लगा। जानना चाहते हैं कि रवि ने क्या किया था।
पहला बदलाव: मुस्कान का जादू
सीनियर से मिले फीडबैक के अगले दिन से रवि ने एक छोटा-सा प्रयोग शुरू किया। ऑफिस पहुंचते ही उसने हर मिलने वाले को मुस्कुराकर नमस्ते या हैलो कहना शुरू कर दिया। पहले जहां लोग थोड़ा रूखा और अनफ्रेंडली समझते थे, वहीं अब लोग खुद आकर उससे बातचीत करने लगे। उसे महसूस हुआ कि एक छोटी-सी मुस्कान कैसे लोगों का नजरिया आपके लिए बदल सकती है।
दूसरा बदलाव: शीशे के सामने 5 मिनट
एक शाम उसने शीशे में खुद को देखा। झुके हुए कंधे, नीचे नजरें और बात करते समय बेचैनी। उसे समझ आया कि लोग उसकी बातों से पहले उसकी बॉडी लैंग्वेज देख रहे थे। इस वजह से उसको गंभीरता से नहीं लेते।
इस बात को इंप्रूव करने के लिए रवि ने रोज सिर्फ 5 मिनट सीधे खड़े होने, आंखों में देखकर बात करने और आत्मविश्वास भरी मुद्रा बनाने का अभ्यास शुरू किया। कुछ ही दिनों में उसके अंदर का आत्मविश्वास बाहर दिखने लगा।

दमदार व्यक्तित्व कुछ छोटे बदलावों से भी पाया जा सकता है
तीसरा बदलाव: कम बोलना, ज्यादा सुनना
रवि को लगता था कि प्रभावशाली बनने के लिए ज्यादा बोलना जरूरी है। लेकिन उसने देखा कि उसके सीनियर अक्सर कम बोलते थे और ज्यादा सुनते थे। उसने भी लोगों की बात बीच में काटना छोड़ दिया। धीरे-धीरे लोग उसे एक समझदार और परिपक्व व्यक्ति की तरह देखने लगे। उसे एहसास हुआ कि अच्छे वक्ता बनने से पहले अच्छा श्रोता बनना जरूरी है।
चौथा बदलाव: खुद से दोस्ती
रवि की एक आदत थी कि वह खुद की आलोचना बहुत करता था। मुझसे नहीं होगा..., मैं उतना अच्छा नहीं हूं..., ये तो मैं कर ही नहीं पाउंगा - आदि बातें उसके दिमाग में चलती रहती थीं। उसने इसी सोच को बदला।
हर सुबह खुद से एक सकारात्मक वाक्य कहना शुरू किया कि मैं सीख रहा हूं और हर दिन बेहतर बन रहा हूं। यह सुनने में छोटा बदलाव था, लेकिन धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास बढ़ने लगा।
पांचवां बदलाव: छोटे शब्द, बड़ा असर
धन्यवाद, कृपया और माफ कीजिए... रवि ने इन तीन शब्दों का इस्तेमाल बढ़ा दिया। उसे आश्चर्य हुआ कि लोग उसके प्रति ज्यादा सहज और सम्मानपूर्ण व्यवहार करने लगे। उसे समझ आया कि अच्छी पर्सनैलिटी सिर्फ दिखावे से नहीं, बल्कि व्यवहार से बनती है।
मोबाइल से दूरी से सुधरे रिश्ते
रवि को याद आया कि एक दिन उसकी दोस्त ने मजाक में कहा कि तुम बात कम और फोन ज्यादा सुनते हो। उस समय तो उसको यह बात चुभ गई थी लेकिन खुद में सुधार के प्रोसेस में रवि ने फैसला किया कि जब किसी से बात करेगा तो मोबाइल दूर रखेगा। अब लोग महसूस करने लगे कि रवि उनकी बातों को महत्व देता है। यही छोटी-सी आदत उसके रिश्तों को मजबूत बनाने लगी।
रवि की कहानी का सबक - छोटे बदलाव बड़ा असर दिखाते हैं
करीब एक महीने बाद एक सहकर्मी ने रवि से कहा कि यार, पता नहीं क्या बदला है, लेकिन तुम पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंट और प्रभावशाली लगते हो। इस रवि मुस्कुरा दिया। उसे पता था कि उसने कोई महंगा कोर्स नहीं किया था, न ही अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। उसने सिर्फ रोज 5 मिनट खुद पर खर्च किए थे।
यही सच है। पर्सनैलिटी में बड़ा बदलाव अक्सर बड़े फैसलों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से आता है। जब आप खुद को थोड़ा समय देना शुरू करते हैं, तो दुनिया भी आपको अलग नजर से देखने लगती है।
