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पैसे निकालने के बाद भी ऐसे बढ़ता रहा फंड, 10 लाख निवेश किए, 12 लाख निकाले, फिर भी बचे रह गए 1 करोड़! कैसे हुआ ये कमाल?

म्यूचुअल फंड की SWP रणनीति के जरिए आप नियमित आय के साथ अपनी पूंजी भी बढ़ा सकते हैं। 10 लाख का एकमुश्त निवेश कर 12 लाख की निकासी के बाद भी 1 करोड़ का फंड तैयार होना कंपाउंडिंग का कमाल है।

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पैसे निकालने के बाद भी ऐसे बढ़ता रहा फंड

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग केवल इस बात से वाकिफ होते हैं कि SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए नियमित बचत करके एक बड़ा फंड या कॉर्पस तैयार किया जा सकता है। हालांकि, बहुत कम लोग इस बात की सही जानकारी रखते हैं कि रिटायरमेंट के बाद या नियमित आय की जरूरत होने पर इस जमा पैसे का इस्तेमाल किस तरह सबसे समझदारी से किया जाए। जब भी एकमुश्त रकम निकालने या खर्च करने की बात आती है, तो लोगों को डर रहता है कि धीरे-धीरे उनका मूल फंड खत्म हो जाएगा। यहीं पर काम आती है फाइनेंशियल वर्ल्ड की एक बेहद प्रभावी रणनीति जिसे SWP यानी सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान कहा जाता है।

यह एक ऐसा तरीका है जो न केवल आपको हर महीने नियमित आय की सुविधा देता है, बल्कि अगर बाजार का रुख सकारात्मक रहे तो आपके द्वारा निकाले गए कुल पैसों के बावजूद आपकी मूल पूंजी को कई गुना तक बढ़ा भी सकता है। इसे समझने के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण देखना काफी दिलचस्प है, जहां एक निवेशक ने ₹10 लाख की शुरुआती राशि से लगातार पैसे भी निकाले और समय के साथ उसका बचा हुआ बैलेंस करोड़ों में बदल गया।

कैसे बढ़ता रहा फंड?

इस पूरी प्रक्रिया का आधार कम्पाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज की वित्तीय योजना है। जब आप म्यूचुअल फंड में SWP का विकल्प चुनते हैं, तो आप अपनी जमा राशि में से हर महीने एक निश्चित रकम निकालने का निर्देश देते हैं। मान लीजिए किसी निवेशक ने किसी अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड में ₹10 लाख का एकमुश्त निवेश किया और इसके साथ ही महीने की एक तय राशि निकालना शुरू किया। अगर बाजार का औसत वार्षिक रिटर्न निवेश की गई राशि पर मिलने वाले विड्रॉल रेट से अधिक रहता है, तो जो पैसा फंड में बचा रहता है उस पर लगातार रिटर्न बनता रहता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि 15-20 वर्षों की लंबी अवधि में फंड औसतन 12 से 15 प्रतिशत का सालाना रिटर्न देता है और निवेशक सालाना 6 से 8 प्रतिशत की दर से पैसा निकालता है, तो निकाली गई राशि के बाद भी बचा हुआ हिस्सा तेजी से बढ़ता रहता है। यही वजह है कि ₹10 लाख के शुरुआती निवेश पर वर्षों तक हर महीने निकासी करते हुए कुल ₹12 लाख निकाले जाने के बावजूद अंत में बचा हुआ कॉर्पस ₹1 करोड़ या उससे अधिक का हो सकता है।

SIP vs SWP ट्रिक

यह कमाल पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने पैसों की निकासी किस दर से करते हैं। अगर आप अपने फंड के सालाना रिटर्न से कम दर पर निकासी करते हैं, तो आपकी मूल पूंजी कभी खत्म नहीं होती, बल्कि बची हुई राशि पर मिलने वाला कंपाउंडिंग रिटर्न आपके फंड को लगातार बड़ा बनाता जाता है। इस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको अपने रोजमर्रा के खर्चों के लिए एक निश्चित और नियमित कैश फ्लो मिलता रहता है, जबकि बाकी बची रकम शेयर बाजार की बढ़त का फायदा उठाती रहती है। यह मॉडल खासतौर पर उन वरिष्ठ नागरिकों और रिटायर्ड व्यक्तियों के लिए एक जीवनदायिनी की तरह काम करता है जो अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखते हुए उससे पेंशन जैसी मासिक आय चाहते हैं।

निवेशकों के लिए सलाह

हालांकि, SWP रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए कुछ बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे पहली बात यह है कि यह प्लान लंबी अवधि के लिए सबसे ज्यादा असरदार होता है, क्योंकि शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। शुरुआती सालों में अगर बाजार बहुत ज्यादा गिरता है, तो निकासी की वजह से फंड पर दबाव आ सकता है, इसलिए हमेशा एक संतुलित और विविधता वाले इक्विटी या हाइब्रिड फंड का चयन करना चाहिए। इसके अलावा, सही समय पर सही फंड चुनना और अपनी विड्रॉल रेट को तर्कसंगत रखना बहुत जरूरी है। यदि कोई निवेशक सही प्लानिंग और धैर्य के साथ SWP का इस्तेमाल करता है, तो वह बिना अपनी पूंजी खोए जिंदगी भर एक तय आय प्राप्त कर सकता है और भविष्य के लिए एक बड़ा फंड भी छोड़ सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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