UP Teacher Bharti: उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से भर्ती की चयन सूची समेत अभ्यर्थियों का पूरा ब्योरा मांगा है। अदालत में 19 हजार सीटों के आरक्षण विवाद को लेकर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया गया। मामले की सुनवाई जस्टिस एसबी भट्टी और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने की। पीठ ने यह भी कहा कि लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले के बाद यदि चयन सूची दोबारा बनती है, तो ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को शामिल करने पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, चयनित शिक्षकों के संबंध में अदालत ने संकेत दिया कि सूची दोबारा बनने पर पहले से चयनित शिक्षकों को तुरंत बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान 18 नवंबर 2020 के आरक्षण संबंधी फैसले का भी उल्लेख हुआ। पीठ ने इस फैसले के हवाले से कहा कि भर्ती में मेरिट और आरक्षण के नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चयनित अभ्यर्थियों की पूरी सूची तैयार करने को कहा है। इसमें अभ्यर्थियों के नाम, क्रमांक, श्रेणी, लिखित परीक्षा के अंक, मेरिट और क्वालिफाइंग अंक समेत अन्य जरूरी जानकारी शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने एटीआरआई के अंक और क्वालिफाइंग अंक को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने यह पूछा कि गलत प्रश्न के कारण एक अंक का लाभ केवल कुछ अभ्यर्थियों को ही क्यों दिया गया। कोर्ट ने कहा कि चयन सूची दोबारा तैयार होने पर ऐसे अभ्यर्थियों को भी इसमें शामिल किया जाए।
सरकार ने क्या कहा?
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि करीब 40 हजार अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी में हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या करीब 36 हजार है। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए जरूरी जानकारी और चयन सूची उपलब्ध कराने को कहा है। अब अभ्यर्थियों की नजर अदालत में पेश होने वाले इस पूरे डेटा और आगे होने वाली सुनवाई पर है।
