How to handle bad peer influence in children: टीनएज में बच्चे दोस्तों की दुनिया में खो जाते हैं। 10-12 साल की उम्र में गलत संगत पढ़ाई छुड़वा सकती है, बुरी आदतें सिखा सकती है। माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि बिना डांटे-फटकारे बच्चे को कैसे बचाएं, क्योंकि सीधे मना करने पर बच्चा और जिद्दी हो जाता है। पेरेंटिग एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दोस्तों को बुरा कहने की बजाय बच्चे की सोच पर काम करें। 12 साल के बाद अलग करना और मुश्किल हो जाता है। इसलिए ये 5 तरीके अपनाएं, जो बच्चे को खुद सही रास्ता चुनने में मदद करेंगे:
शांति से बच्चे से बातचीत करें
बच्चे को शांत मन से बैठाकर पूछें- क्या उनके दोस्त उन्हें बेहतर इंसान बना रहे हैं या झूठ बोलना सिखा रहे हैं? क्या उनके साथ रहने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है या डर लगता है? ऐसे सवाल बच्चे के दिमाग को सक्रिय करते हैं। वे खुद अपने दोस्तों के बारे में सोचने लगते हैं और गलत संगत की पहचान कर लेते हैं।
पुराने दोस्तों का रीप्लेसमेंट दें
दोस्तों की तुलना या बुराई न करें। इसके बजाय बच्चे को नए ग्रुप में शामिल कराएं- जैसे स्पोर्ट्स, म्यूजिक क्लास, ड्राइंग, आर्ट या किसी कजिन/रिश्तेदार के बच्चों के साथ समय बिताना। जब नए दोस्तों के साथ बच्चा कूल और कॉन्फिडेंट महसूस करेगा, तो धीरे-धीरे पुराने ग्रुप से भावनात्मक दूरी बन जाएगी।
दोस्ती से जुड़ी फिल्म या कहानी दिखाएं
ऐसी फिल्म या कहानी चुनें जिसमें गलत दोस्तों की वजह से बच्चा मुश्किल में पड़ता है और एक अच्छा दोस्त उसकी मदद करता है। कहानी खत्म होने के बाद पूछें कि अगर तुम उसकी जगह होते तो क्या करते? यह तरीका बच्चे के दिल तक सीधे पहुंचता है। वे खुद गलत संगत के नुकसान समझ जाते हैं।
फैसला लेने का अधिकार बच्चे को दें
रोजाना कम से कम 10 मिनट बिना फोन के शांत बैठकर बात करें। बच्चे को बताएं कि आप उसे रोकना नहीं चाहते, बस उसकी भलाई चाहते हैं। कहें सही-गलत फैसला लेने की आजादी तुम्हारी है। इससे बच्चे में जिम्मेदारी का भाव आता है और वे खुद सही चुनाव करने लगते हैं।
भविष्य पर फोकस करवाएं
बच्चा तभी बुरी संगत छोड़ेगा जब वह अपने भविष्य के बारे में सोचेगा। उसके कमरे में एक बड़ा पोस्टर लगाएं- मैं बड़ा होकर क्या बनना चाहता हूं? हर हफ्ते उसे एक नया सकारात्मक विचार लिखवाएं। इससे बच्चे का ध्यान सपनों पर जाएगा और गलत दोस्तों से दूरी खुद-ब-खुद बढ़ेगी।
ये तरीके डांटने की बजाय बच्चे की सोच बदलते हैं। धैर्य रखें बच्चा खुद सही रास्ता चुन लेगा। बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार और समझ ही सबसे बड़ा हथियार है।
