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ऑनलाइन गेम्स बच्चों के दिमाग पर कैसे डाल रहे हैं बुरा असर, जानिए मेंटल हेल्थ पर क्या पड़ रहा असर

  • Authored by: Vineet
  • Updated Feb 4, 2026, 03:26 PM IST

Impact of Online Gaming Addiction On children: ऑनलाइन गेम्स बच्चों के दिमाग और मेंटल हेल्थ पर किस तरह असर डाल रहे हैं? हाल ही में गाजियाबाद में सामने आए मामले ने डॉक्टर्स और पेरेंट्स दोनो की ही चिंताएं बढ़ा दी हैं। चलिए आज आपको बताते हैं आखिर बच्चों की हेल्थ को कैसे खराब कर रही है ऑनलाइन गेमिंग..

ऑनलाइन गेमिंग कैसे बनीं बच्चों की मेंटल हेल्थ का दुश्मन

ऑनलाइन गेमिंग कैसे बनीं बच्चों की मेंटल हेल्थ का दुश्मन

Impact of Online Gaming Addiction On children: आजकल के बच्चे ऑनलाइन गेम्स के प्रति बहुत आकर्षित हैं। ये गेम्स न केवल मनोरंजन का एक साधन हैं, बल्कि बच्चों के दिमाग पर गहरा असर भी डाल सकते हैं। हाल ही में गाज़ियाबाद में हुई एक घटना ने इस विषय पर एक नई बहस छेड़ दी है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित और लंबे समय तक गेमिंग बच्चों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को गंभीरता से प्रभावित कर सकती है। इस लेख में हम जानेंगे कि ऑनलाइन गेम्स बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता चलन

पैंडेमिक के बाद से, ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। मल्टीप्लेयर गेम्स और प्रतिस्पर्धात्मक प्रारूप बच्चों को अधिक आकर्षित करते हैं। इस समय, बच्चों का मानसिक विकास और भावनात्मक संतुलन अभी भी निर्माणाधीन है, जिससे वे गेमिंग के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गेमिंग बच्चों की मानसिक और भावनात्मक भलाई पर गंभीर असर डाल सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से चिंता, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, आक्रामकता और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई बच्चे ऐसे लक्षण दिखाते हैं जो व्यवहारिक लत के समान होते हैं, जैसे कि गेमिंग के बिना बेचैनी महसूस करना।

माता-पिता को क्या देखना चाहिए?

माता-पिता को बच्चों में गेमिंग लत और मानसिक तनाव के प्रारंभिक संकेतों की पहचान करनी चाहिए। जैसे कि जब बच्चे गेमिंग के लिए अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, स्कूल में प्रदर्शन में गिरावट आती है, या सामाजिक गतिविधियों से दूर रहने लगते हैं। ऐसे मामलों में, माता-पिता को तुरंत मदद लेनी चाहिए।

स्कूलों की भूमिका

स्कूलों को बच्चों की गेमिंग आदतों पर नजर रखनी चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली उपलब्ध करानी चाहिए। नियमित मानसिक स्वास्थ्य चेक-इन और परामर्शदाताओं की उपलब्धता बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

समाधान और सुझाव

विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को खुला संवाद बनाए रखना चाहिए, स्वस्थ स्क्रीन समय सीमाएँ निर्धारित करनी चाहिए और ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए। परिवारों को स्क्रीन समय के लिए नियम बनाना चाहिए और बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए।

अत्यधिक गेमिंग को बच्चों की अनदेखी भावनात्मक जरूरतों, शैक्षणिक तनाव या सामाजिक दबाव का संकेत माना जाना चाहिए। इस प्रकार, ऑनलाइन गेमिंग एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है, जो बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। इसे समझना और सही कदम उठाना आवश्यक है।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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