CA Amit Kumar Success Story In Hindi: कड़ी मेहनत व संघर्ष से व्यक्ति बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर सकता है। कुछ ऐसी ही कहानी है पटना जिले के छोटे से गांव ताजपुर डीह के ताल्लुक रखने वाले सीए अमित कुमार की। उन्होंने साल 2025 में दूसरे अटेम्प्ट में सीए फाइनल क्रैक किया था। बता दें अमित के लिए यह सफर आसान नहीं था। अमित का बचपन काफी गरीबी में बीता, उनके पिता एक साधारण से किसान थे। उनके सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो संसाधन या किसी अन्य चीज को कमी बताकर अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं। यहां आप अमित के पढ़ाई लिखाई से लेकर सीए बनने के सफर के बारे में जान सकते हैं।
CA Amit Kumar Motivational Story: तीनों भाई बहनों में सबसे बड़े
बता दें अमित अपने तीन भाई बहनों में सबसे बड़े हैं। उनकी शुरुाती पढ़ाई लिखाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका सपना था कि वह आईआईटी में पढ़ाई कर इंजीनियर बनें, लेकिन उनका यह सपना पूरा न हो सका। अमित ने भी हार नहीं मानी और चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई शुरू कर दी। वह सीए की तैयारी करने के लिए पटना आ गए। लगातार चार महीने की तैयार के बाद अमित ने पहला अटैम्प्ट फाउंडेशन क्रैक कर दिया।
CA Amit Kumar Success Story: पहले अटैम्प्ट में क्रैक किया सीए फाउंडेशन
सीए फाउंडेशन की परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद अमित ने आईपीसीसी यानी इंटरमीडिएट की तैयारी के लिए कोचिंग लेना शुरू कर दिया। उनकी कोचिंग घर से करीब 35 किलोमीटर दूर थी, ऐसे में आने जाने में उन्हें करीब 70 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। वह रोजाना दो घंटे का सफर तय कर कोचिंग पहुंचते थे। यहां करीब 9 घंटे की क्लास होती थी।
CA Success Story: दूसरे अटैम्प्ट में सीए फाइनल क्रैक
लगातार 3 साल की मेहनत के बाद अमित ने इंटरमीडिएट लेवल भी पास कर लिया। इसी बीच कोरोना ने भी दस्तक दे दिया। उन्होंने एक साल घर पर रहकर पढ़ाई की। कोविड के बाद उनके बुआ फूफा ने पढ़ाई के लिए उन्हें दिल्ली बुला लिया। यहां उन्होंने आईपीसीसी के बाद तीन साल की ट्रेनिंग की, फिर साल 2024 में फाइनल की परीक्षा में शामिल हुए। लेकिन यहां वह करीब 16 नंबर से चूक गए। दूसरी बार साल 2025 में दूसरी बार फिर वह फाइनल की परीक्षा में शामिल हुए और एग्जाम क्रैक कर लिया।
माता पिता और बुआ फूफा को दिया सफला का श्रेय
अमित ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता के साथ बुआ और फूफा को भी दिया। अमित के करियर में कई ऐसे पड़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत के दम पर अने मुकाम को पूरा किया।
