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कैंसर दवाओं पर GST घटा, तंबाकू पर बढ़ा टैक्स, AIIMS रिसर्च ने बताया पब्लिक हेल्थ को होने वाला फायदा

  • Edited by: Vineet
  • Updated Feb 5, 2026, 06:52 PM IST

एम्स के अध्ययन में सामने आया है कि कैंसर दवाओं पर जीएसटी हटाना और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अहम कदम हैं। इससे कैंसर इलाज सस्ता हुआ है, मरीजों का जेब से खर्च कम हुआ है और तंबाकू सेवन पर रोक लगेगी, जिससे कैंसर के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

बजट से पब्लिक हेल्थ को होने वाला फायदा

बजट से पब्लिक हेल्थ को होने वाला फायदा

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज आज भी आम आदमी के लिए सबसे बड़ा आर्थिक बोझ माना जाता है। ऐसे में सरकार द्वारा जीवनरक्षक कैंसर दवाओं पर जीएसटी हटाना और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक मजबूत कदम है। एम्स के नए अध्ययन ने साफ किया है कि ये फैसले इलाज को सुलभ बनाने के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

जीएसटी में कटौती से कैंसर इलाज हुआ किफायती

एम्स के ऑन्कोलॉजिस्ट्स द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, जीएसटी परिषद ने अपनी 56वीं बैठक में 33 जीवनरक्षक दवाओं को पूरी तरह टैक्स-मुक्त करने की सिफारिश की थी। इनमें कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई अहम दवाएं शामिल हैं, जिन पर पहले 12 प्रतिशत या 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था। टैक्स हटने से इन दवाओं की कीमत कम हुई है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव घटा है।

मरीजों की जेब से होने वाला खर्च हुआ कम

अध्ययन में बताया गया है कि जीएसटी में राहत का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि इलाज पर होने वाला आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च कम हुआ है। भारत जैसे देश में, जहां बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य बीमा के दायरे से बाहर हैं, यह राहत सीधे मरीजों की पहुंच और इलाज की निरंतरता को बेहतर बनाती है।

बजट में भी मिला कैंसर मरीजों को सहारा

इस दिशा में एक और बड़ा कदम तब देखने को मिला, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटाने की घोषणा की। एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, ये फैसले कैंसर उपचार को अधिक सुलभ और समान बनाने की नीति को दर्शाते हैं।

तंबाकू पर बढ़ा टैक्स, रोकथाम को मिली ताकत

अध्ययन में यह भी सामने आया कि जीएसटी परिषद ने तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है, जो किसी भी वस्तु श्रेणी में सबसे अधिक है। 1 फरवरी से लागू हुए इस फैसले से तंबाकू के उपभोग में कमी आने और कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए दूरगामी असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तंबाकू सभी नए कैंसर मामलों के लगभग 15 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू पर अधिक टैक्स न सिर्फ लोगों को इससे दूर करता है, बल्कि इससे मिलने वाला राजस्व स्वास्थ्य सेवाओं में दोबारा निवेश का जरिया भी बन सकता है। एम्स अध्ययन के मुताबिक, इन नीतियों से समय से पहले मौतों में कमी, इलाज की लागत में बचत और गरीबी में गिरावट जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

Inputs: IANS

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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