Aaj ka Suvichar: धुंध कब तक छाई रहेगी, मौसम खुलने के इंतजार के बीच जान लें कोहरा बता क्या रहा है
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Jan 17, 2026, 11:10 AM IST
आज का सुविचार (Life Lessons from Fog): उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के बीच धुंध भी पड़ गई है। कोहरा इतना गहरा है कि पास की चीज भी साफ दिखाई नहीं दे रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कोहरा एक जीवन दर्शन भी है। यहां जानें कि कोहरा जीवन का क्या बड़ा सबक देता है।
सुविचार : कोहरा हमें क्या सिखाता है
आज का सुविचार (Life Lessons from Fog): इन दिनों उत्तर भारत के कई शहरों में कोहरे की मार है। दिल्ली एनसीआर में रोज सुबह विजिबिलिटी कम रहती है। पास की चीज भी स्पष्ट नहीं दिखती है। ऐसे में लोगों को इस बात का इंतजार है कि कोहरा कब तक रहेगा, धुंध कब छंटेगी, मौसम कब साफ होगा। लेकिन गौर करें तो पाएंगे कि ये सवाल बस महज मौसम से जुड़े नहीं है बल्कि हमारे अंदर की आवाज भी हैं।
हम भी तो कितनी बार जीवन में दुविधा रूपी कोहरे में फंसते हैं। किसी समस्या का समाधान पास होने पर भी स्पष्ट नहीं दिखता है। चारों तरफ उम्मीद की नजर फैलाने पर भी कहीं सहारा नहीं दिखता। ऐसे में जरूरी है कि खुद पर भरोसा रखा जाए। मौसम के साफ होने यानी सही वक्त आने का संयम के साथ इंतजार किया जाए।
बेशक बाहर छाया कोहरा केवल मौसम की एक स्थिति नहीं है। यह जीवन का गहरा प्रतीक भी है। जब कोहरा होता है, तो हमें सामने की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं, रास्ता धुंधला हो जाता है और कदम संभलकर रखने पड़ते हैं। यही स्थिति जीवन में भी आती है, जब भविष्य स्पष्ट नहीं होता, निर्णय कठिन लगते हैं और मन असमंजस से भर जाता है।
कोहरा हमें क्या सिखाता है
कोहरा हमें धैर्य सिखाता है। ऐसे समय में तेज दौड़ने के बजाय धीरे चलना ही समझदारी होती है। जीवन में भी जब परिस्थितियां स्पष्ट न हों, तब जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। कोहरा यह समझाता है कि हर सवाल का जवाब तुरंत नहीं मिलता, कभी-कभी समय के साथ ही दृश्य साफ़ होता है।
इसके साथ ही कोहरा विश्वास और आत्मबल का पाठ पढ़ाता है। जब सामने कुछ दिखता नहीं, तब हमें अपने अनुभव, विवेक और अंदर की आवाज़ पर भरोसा करना पड़ता है। ठीक वैसे ही जैसे जीवन में अंधेरे या भ्रम के दौर में बाहरी सहारों से ज्यादा आत्मविश्वास काम आता है।
अंततः, कोहरा हमें यह भी याद दिलाता है कि हर धुंध स्थायी नहीं होती। जैसे-जैसे सूरज निकलता है, कोहरा अपने आप छंट जाता है। जीवन की उलझनें, डर और अनिश्चितताएं भी समय, प्रयास और सकारात्मक सोच से धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं। इसलिए कोहरे से घबराने के बजाय, उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही समझदारी है।
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