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Fanaa Shayari: इश्क की आखिरी हद है फना होना, पढ़ें फना होने पर 10 मशहूर शेर

Fanaa Shayari in Hindi: इश्क में फना होना वह मुकाम है जहां मैं खत्म होता है और तू शुरू होता है। फना का सही अर्थ खुदा में लीन हो जाती है। मिटकर फिर से अमर हो जाने का नाम ही फना है। पढ़ें फना पर लिखे चंद मशहूर शेर:

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इश्क में फना शायरी (Photo: iStock)

Fanaa Shayari in Hindi: इश्क में फना हो जाना सिर्फ मिट जाना नहीं होता, यह इश्क की आखिरी हद है। इस मुकाम पर आशिक खुद को अपने महबूब या खुदा में इस कदर मिटा देता है कि उसका वजूद तक नहीं बचता। यह मिटना हार नहीं बल्कि सबसे बड़ा हासिल है। फना का मतलब है अपने अहंकार, अपनी इच्छाओं और अपने अस्तित्व को प्रेम या भक्ति के रंग में इस तरह डुबो देना कि अब सिर्फ महबूब या परमात्मा ही बचे। इसी फना पर बहुत से शायरों ने एक से बढ़कर एक खूबसूरत शेर गढ़े हैं। आइए डालते हैं फना पर लिखे चंद मशहूर शेरों पर एक नजर:

1. इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

- मिर्ज़ा ग़ालिब

2. मैं चाहता हूं मोहब्बत मुझे फ़ना कर दे

फ़ना भी ऐसा कि जिस की कोई मिसाल न हो

- जव्वाद शैख़

3. सारी गली सुनसान पड़ी थी बाद-ए-फ़ना के पहरे में

हिज्र के दालान और आँगन में बस इक साया ज़िंदा था

- जौन एलिया

4. मुझे तुम्हारे तग़ाफ़ुल से क्यूं शिकायत हो

मिरी फ़ना मिरे एहसास का तक़ाज़ा है

- साहिर लुधियानवी

5. अव्वल ओ आख़िर फ़ना बातिन ओ ज़ाहिर फ़ना

नक़्श-ए-कुहन हो कि नौ मंज़िल-ए-आख़िर फ़ना

- अल्लामा इक़बाल

6. फ़ना-फ़िल-इश्क़ होना चाहते थे

मगर फ़ुर्सत न थी कार-ए-जहां से

- परवीन शाकिर

7. राहत के महलों को बला पूछ रही है

हस्ती के मकानों को फ़ना पूछ रही है

- मिर्ज़ा सलामत अली दबीर

8. मैं वो फ़तादा हूं कि बग़ैर-अज़-फ़ना मुझे

नक़्श-ए-क़दम की तरह न कोई उठा सके

- ख़्वाजा मीर दर्द

9. जैसे फ़ना बक़ा में भी कोई कमी सी हो

मुझ को पड़ी है तेरी ज़रूरत कहाँ कहाँ

- फ़िराक़ गोरखपुरी

10. कितने पुर-उम्मीद कितने ख़ूबसूरत हैं ये लोग

क्या ये सब बाज़ू ये सब चेहरे फ़ना हो जाएंगे

- अहमद मुश्ताक़

उम्मीद करते हैं कि आपको ये शेर जरूर पसंद आए होंगे। आप मशहूर शायरों की कलम से निकले इन खूबसूरत शेर को अपने किसी बेहद खास के दिल तक पहुंचा सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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