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तनाव में अपने ही बाल क्यों खींचने लगते हैं कुछ लोग, क्या कहता है मनोविज्ञान?

अगर तनाव में अपने ही बाल खींचने की यह आदत कभी-कभार होने वाली सुस्ती या शौक से बढ़कर एक ऐसी स्थिति बन जाए तो इसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए।

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तनाव में अपने ही बाल क्यों खींचने लगते हैं कुछ लोग (Photo: iStock)

रोज की भागदौड़, काम का प्रेशर और बेचैनी आज के टाइम में बहुत आम हो चली है। तनाव से निपटने के लिए हर किसी का अलग तरीका होता है। कुछ लोग वॉक करते हैं, कुछ संगीत सुनते हैं, तो वहीं कुछ लोग तनाव में अनजाने में अपनी ही सेहत या शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली अजीब आदतें अपना लेते हैं। ऐसी ही एक गंभीर स्थिति है बालों को लगातार खींचना या नोचना। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, तनाव और मानसिक दबाव का बालों को खींचने की इस आदत से गहरा संबंध है।

ट्राइकोटिलोमेनिया कहलाती है ये कंडीशन

मेडिकल टर्म में बालों को बार-बार खींचने की इस मानसिक और व्यवहारिक स्थिति को ट्राइकोटिलोमेनिया कहा जाता है। यह एक प्रकार का इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति अपने सिर, भौंहों, पलकों या शरीर के अन्य हिस्सों से बाल खींचने की इच्छा को रोक नहीं पाता है। शुरुआत में यह आदत तनाव या चिंता से राहत पाने का एक जरिया लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर समस्या का रूप ले लेती है।

तनाव और बाल खींचने का क्या है कनेक्शन?

जब कोई बहुत ज्यादा मानसिक तनाव, बोरियत, घबराहट या भावनात्मक थकान से गुजरता है, तो उसका मस्तिष्क इस दबाव को कम करने के लिए शरीर के किसी हिस्से पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता है। बाल खींचने से मिलने वाला सेंसरी फीडबैक कुछ पलों के लिए व्यक्ति को मानसिक शांति या आराम का एहसास कराता है। हालांकि, इसके तुरंत बाद व्यक्ति को अपराधबोध, शर्म या निराशा महसूस होती है, जिससे तनाव और अधिक बढ़ जाता है और यह चक्र लगातार चलता रहता है।

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कब लें डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक की मदद?

हर बात तनाव की स्थिति में अपने ही बाल खींचने की ये आदत कभी-कभार होने वाली सुस्ती या शौक से बढ़कर एक ऐसी स्थिति बन जाए तो इसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए। मनोवैज्ञानिक इसके इलाज के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी और हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग का सहारा लेते हैं। इसके जरिए व्यक्ति को तनाव से निपटने के दूसरे स्वस्थ तरीके सिखाए जाते हैं।

अगर आप या आपका कोई परिचित इस समस्या से जूझ रहा है, तो समय पर किसी पेशेवर काउंसलर या मनोचिकित्सक से सलाह लेना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सतर्कता इंसान को बड़े खतरे से बचा सकती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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