लाइफस्टाइल

राशन खरीदने जाएं तो बच्चे को भी जरूर साथ ले जाएं, पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स की सलाह

सुपर मार्केट में लंबी लाइनों में खड़े होना, अपनी बारी का इंतजार करना और पसंद की हर चीज तुरंत न मिलने पर सब्र करना बच्चों को धैर्य सिखाता है।

Image

राशन खरीदने जाएं तो बच्चे को भी साथ ले जाएं, पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स की सलाह (Photo: iStock)

बहुत से पेरेंट्स जब राशन खरीदने सुपरमार्केट जाते हैं तो अपने साथ बच्चों को ले जाने से कतराते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं बच्चा कुछ खरीदने की जिद ना करने लगे या फिर इधर-उधर ना भांगने लगे। ऐसे पेरेंट्स शायद ही जानते होंगे कि वो बच्चों को अपने साथ बाजार ना ले जाकर कितनी बड़ी गलती कर रहे हैं। पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चे पेरेंट्स संग बाजार जाकर ऐसे कई हुनर सिखाते हैं जो स्कूल की किताबों में नहीं पढ़ाया जाता।

पैसे और बजट का व्यावहारिक ज्ञान

जब बच्चे अपने माता-पिता के साथ खरीदारी करने जाते हैं, तो वे पैसे के असली मूल्य को समझते हैं। वे देखते हैं कि कैसे सामान की कीमत जांची जाती है, बजट के हिसाब से खरीदारी कैसे होती है और जरूरत और चाहत में क्या अंतर होता है। यह व्यावहारिक अनुभव उन्हें कम उम्र से ही आर्थिक रूप से समझदार और अनुशासित बनाता है, जो बड़े होने पर उनके बहुत काम आता है।

निर्णय लेने की क्षमता का विकास

दुकान के गलियारों में बच्चों को छोटे-छोटे फैसले लेने का मौका मिलता है। उदाहरण के लिए, उनसे पूछना कि हमें कौन से फल खरीदने चाहिए या नाश्ते के लिए कौन सा विकल्प बेहतर रहेगा? बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी पसंद के चुनाव की जिम्मेदारी लेना सीखते हैं।

धैर्य और संयम का पाठ

सुपर मार्केट में लंबी लाइनों में खड़े होना, अपनी बारी का इंतजार करना और पसंद की हर चीज तुरंत न मिलने पर सब्र करना बच्चों को धैर्य सिखाता है। यह माहौल उन्हें सिखाता है कि समाज में रहने के कुछ नियम होते हैं और हर इच्छा तुरंत पूरी नहीं हो सकती। यह मानसिक परिपक्वता उनके समग्र व्यक्तित्व को निखारती है।

संवाद और भाषा कौशल में सुधार

खरीदारी के दौरान बच्चों से बातचीत करना उनके कम्यूनिकेशन स्किल को बेहतर बनाता है। फल-सब्जियों के नाम जानना, उनके रंग-रूप और फायदों पर चर्चा करना, और दुकानदारों से शिष्टाचार से बात करना देखना बच्चों के शब्द भंडार को समृद्ध करता है। यह उनके सामाजिक कौशल को भी मजबूत करता है।

सहभागिता और अपनेपन का अहसास

जब पैरेंट्स बच्चों को ग्रोसरी शॉपिंग में शामिल करते हैं, तो बच्चों को यह महसूस होता है कि वे परिवार के एक महत्वपूर्ण हिस्से हैं। वे खुद को घर की व्यवस्था में मददगार मानते हैं, जिससे उनका आत्म-सम्मान बढ़ता है और माता-पिता के साथ उनका रिश्ता और अधिक गहरा होता है।

बच्चों को साथ लेकर बाजार जाने के जो मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक लाभ हैं, वे अनमोल हैं। इसलिए अगली बार जब आप किराने का सामान खरीदने जाएं, अपने बच्चों को साथ जरूर ले जाएं। यह छोटी सी आदत उन्हें आने वाले कल के लिए एक जिम्मेदार, समझदार और आत्मनिर्भर इंसान बनाने में बहुत मदद करेगी।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article