काले कान, लाल निकर, पीले जूते, सफेद दस्ताने और चेहरे पर हमेशा खिली रहने वाली मुस्कान। यह पहचान है दुनिया के उस सबसे मशहूर कार्टून कैरेक्टर की जिसे हम सब मिकी माउस के नाम से जानते हैं। करीब एक सदी से ये अपनी शरारतों और मासूमियत से दुनियाभर के उदास चेहरों पर खुशियां बिखेर रहा है। समय बहुत बदला, कई पीढ़ियां बदलीं, लेकिन मिकी की लोकप्रियता कम नहीं हुई। आज 31 मई है और साल 1929 में आज के ही दिन लोगों ने पहली बार मिकी माउस की आवाज सुनी थी।
एनिमेशन की दुनिया में मिकी महज एक किरदार का नाम नहीं है। यह संघर्ष, कल्पनाशक्ति और कभी हार न मानने की जिद की कहानी भी है। ये कहानी उस विश्वास की भी है जिसने एक टूट चुके इंसान को अरबों का मालिक बनवा दिया। इस कहानी को समझने के लिए करीब 125 साल पीछे चलना होगा।
वाल्ट डिज्नी: कार्टून की दुनिया का किंग
5 दिसंबर 1901 को अमेरिका के शिकागो में जन्म हुआ वॉल्टर एलियास डिज्नी, जिन्हें हम वॉल्ट डिज्नी के नाम से जानते हैं। उन्हें बचपन से ही कार्टून बनाने का शौक था। वे घंटों कागज पर स्केच बना सकते थे। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था तो कम उम्र में ही डिज्नी को अखबार बांटने और छोटे-मोटे कामों में लगना पड़ा। बावजूद इसके उनके भीतर का कलाकार हमेशा जिंदा रहा।
किशोरावस्था में वॉल्ट डिज्नी ने ड्राइंग और आर्ट की पढ़ाई शुरू की। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन उम्र कम होने के कारण उन्हें अनुमति नहीं मिली। बाद में उन्होंने रेड क्रॉस के लिए काम किया। वह खाली समय में रेड क्रॉस की एंबुलेंस तक पर कार्टून बना दिया करते थे। वहीं से किसी ने उन्हें सलाह दी कि तुम अखबार के लिए कार्टून क्यों नहीं बनाते।

प्रतीकात्मक फोटो (AI Generated Image)
नौकरी और अपमान
वॉल्ट डिज्नी ने सलाह मानी और अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार में नौकरी करने लगे। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अखबार की नौकरी से निकाल दिया गया। कहा जाता है कि उनके संपादक ने यह कहते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया कि उनमें पर्याप्त कल्पनाशक्ति और क्रिएटिविटी की कमी है। यह वाल्ट डिज्नी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्हें अफसोस इस बात का नहीं था कि नौकरी से निकाल दिया। उन्हें हमेशा ये बात खटकती रही कि उनकी क्रिएटिविटी पर सवाल उठाया गया।
इस अपमान का कड़वा घूंट वाल्ट डिज्नी के गले से नहीं उतरा। 1926 में वाल्ट डिज्नी ने अपने भाई रॉय के साथ मिलकर अपना एनिमेशन स्टूडियो खोला। नाम रखा डिज्नी ब्रदर्स कार्टून स्टूडियो। आगे चलकर इसका नाम हुआ वाल्ट डिज्नी स्टूडियो। 1927 में डिज्नी ने एनिमेटेड फिल्मों को बनाना शुरू किया।
जब वाल्ट डिज्नी को लगा दूसरा झटका
डिज्नी स्टूडियो का ने यूनिवर्सल पिक्चर्स के लिए ओसवाल्ड द लकी रैबिट नाम का कार्टून कैरेक्टर तैयार किया। देखते देखते ओसवाल्ड पूरे अमेरिका में छा गया। नतीजा ये हुआ कि डिज्नी से पहले यूनिवर्सल पिक्चर्स ने इसके राइट्स खरीद लिये। ये वाल्ट डिज्नी को दूसरा बड़ा झटका था।

डिज्नी से छिन गया ओसवाल्ड द लकी रैबिट
इस झटके का असर ये हुआ कि वाल्ट जिज्नी ने ये तय कर लिया कि अब वह सिर्फ अपने लिये फिल्मे बनाएंगे। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती थी ओसवाल्ड द लकी रैबिट के मुकाबले किसी नए कार्टून कैरेक्टर को जिंदा करने की। वाल्ट डिज्नी काम पर लग गए। महीनों तक वह नए किरदार के बारे में सोचते रहे। कभी गाय पर काम किया तो कभी मेंढक पर तो कभी घोड़े पर। लेकिन कोई भी कैरेक्टर उन्हें ओसवाल्ड के टक्कर का नहीं लगा।
डिज्नी ने चूहे को बनाया हीरो
इधर समय कुछ नया नहीं हो पा रहा था और उधर उन्हीं के गढ़े कार्टून कैरेक्टर ओसवाल्ड से यूनिवर्सल अंधाधुन डॉलर बटोर रहा था। इसी तनाव में एक दिन वाल्ट डिज्नी अपने दफ्तर के सोफे पर पैर फैला कर बैठे हुए थे। तभी एक चूहा आया और ऑफिस में इधर उधर कूदने लगा। वाल्ट डिज्नी ने उसे देखा और नजरअंदाज कर दिया।
चूहे की हिम्मत बढ़ी। वह डिज्नी के पैरों के पास आ गया और उनके मोजे काटने की कोशिश करने लगा। डिज्नी ने पैर झटके उसकी तरफ गुस्से से देखा और फिर अपनी ही दुनिया में खो गए। चूहा फिर आया और उनके पैरों पर उछल कूद करने लगा।

कार्टून की दुनिया का सुपरस्टार बनने वाला था चूहा (AI Image)
वाल्ट डिज्नी ने फिर उसे नजरअंदाज किया लेकिन अगले ही पल वह चौंक कर उठे और दफ्तर में चिल्लाने लगे- हमें मिल गया नया कैरेक्टर। तुरंत कागज कलम उठाकर उन्होंने उस चूहे का कार्टून उकेर डाला। चूहे की बेपरवाही और फुर्ती को आधार बना उन्होंने अपना नया किरदार बनाया जिसे नाम दिया मार्टिमर।
..और दुनिया को मिला मिकी माउस
कुछ दिनों के बाद मार्टिमर माउस का पूरा हुलिया तैयार हो गया। इसे उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी को दिखाया। पत्नी को यह कुछ खास पसंद नहीं आया। उन्होंने कुछ फेरबदल करवाए। मार्टिमर के हाथों में दस्ताने और पैरों में पीले जूते पहनवा दिये। नाम भी बदलवा दिया। वाल्ट डिज्नी की पत्नी ने इस कैरेक्टर को नाम दिया मिकी माउस। इस तरह जन्म हुआ ऐसे कार्टून कैरेक्टर का जो आने वाले 100 सालों तक एनिमेशन और कार्टून की दुनिया पर राज करने वाला था।

मार्टिमर बना मिकी
साल 1928 में डिज्नी ने अपने मिकी माउस पर दो शॉर्ट फिल्में बनाईं- प्लेन क्रेजी और द गैलोपिन गैचो। दोनों को खूब सराहा गया। मिकी ओसवाल्ट पर भारी पड़ने लगा।अगले ही साल यानी कि 1929 में डिज्नी ने मिकी माउस की पहली फिल्म द कार्निवल किड बनाई। इसमें पहली बार मिकी को बोलते हुए दिखाया गया। वॉल्ट ने ही मिकी को आवाज दी थी। इस फिल्म ने उनकी दुनिया बदल दी। मिकी इतना ज्यादा पॉपुलर हुआ जिसका अंदाजा किसी ने नहीं लगाया था।
साल दर साल मिकी माउस की लोकप्रियता बढ़ती गई और डिज्नी स्टूडियो भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छूने लगा। इसके बाद 'स्नो व्हाइट एंड द सेवेन ड्वार्फ्स', 'पिनोच्चियो', 'डम्बो', 'सिंड्रेला' और कई शानदार फिल्मों ने एनीमेशन की दुनिया बदल दी।
मिकी और डिज्नी ने मिलकर रच दिया इतिहास
धीरे-धीरे डिज्नी केवल एक स्टूडियो नहीं रहा, मनोरंजन की सबसे बड़ी पहचान बन गया। थीम पार्क, फिल्में, टीवी शो और अनगिनत किरदारों के जरिए डिज्नी ने पूरी दुनिया में अपना दबदबा कायम कर लिया। वाल्ट डिज्नी के नाम 22 अकादमी अवॉर्ड और 59 ऑस्कर नॉमिनेशन का ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जो टूटना लगभग असंभव है।

(फोटो सोर्स: Walt Disney Family Museum/fb)
ये वाल्ट डिज्नी की जिद और मेहनत का ही नतीजा था कि जिस इंसान को क्रिएटिव ना होने का धब्बा लगाकर नौकरी से निकाल दिया, उसी ने अपनी कल्पना से पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना लिया।
और शायद यही डिज्नी और मिकी माउस की सच्ची कहानी का सबसे खूबसूरत संदेश भी है कि कई बार इतिहास बदलने के लिए किसी बड़े चमत्कार की नहीं, एक छोटे से सपने और उसे सच करने की जिद की जरूरत होती है। आज करीब एक सदी बीत गए लेकिन आज भी वाल्ट डिज्नी का मिकी एक ऐसी दुनिया का प्रतिनिधित्व कर रहा है जहां समस्याओं से ज्यादा उम्मीदें हैं और जहां हर कहानी और परेशानी का अंत मुस्कुराहट के साथ होता है।
