History of Hing in Hindi: हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा ही आवे- यह मुहावरा मसालों में हींग के महत्व को बताने के लिए काफी है। इसका मतलब होता है बिना कुछ खर्च किए काम बन जाना। सालों से हींग भारतीय रसोई का अभिन्न अंग है। हर घर में आपको हींग मिल जाएगी। ज्यादातर घरों में चाहे कोई सा भी व्यंजन बनाना हो उसमें एक चुटकी हींग तो जरूर डाली जाती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ भारत ही ऐसा देश है जहां हींग को खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हींग कहने को तो भारतीय मसाला है लेकिन इसकी जड़ें विदेशी हैं। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि सिकंदर के जरिए हींग भारत आई थी। आइए जानते हैं हींग से जुड़ी कुछ खास अनसुनी बातें।
कैसे पड़ा हींग का नाम
हींग अपने स्वाद के साथ ही अपनी महक के लिए भी जाना जाता है। इसकी महक बहुत तेज होती है। इसकी महक के कारण ही अंग्रेजी में इसका नाम ऐसाफेटिडा (Asafoetida) रखा गया था। Asa पारसी भाषा का शब्द है। इसका मतलब होता है गोंद। वहीं Foetida लैटिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब तेज गंध वाला होता है। हींग की महक इतनी तेज होती है कि अगर हींग हाथ में लग जाए तो चाहे जितना धुल लें, यह लंबे समय तक बना रहता है।

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कैसे बनती है हींग
हींग के पौधे को फेरुला ऐसाफेटिडा कहा जाता है। यह जंगली सौंफ की प्रजाति का पौधा है। पौधे की लंबाई लगभग 1 से 1.5 मीटर होती है। इस पौधे की जड़ से एक चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता है, जिसे इकट्ठा करके प्रोसेस किया जाता है। प्रोसेस करने की जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि कच्ची हींग की महक बहुत तीखी होती है। इसे सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कच्चे हींग की प्रोसेसिंग के लिए चावल का आटा, गोंद, स्टार्च सहित कुछ अन्य चीजों मिलाई जाती है। फिर इस मिक्सचर को हाथ या मशीन से गोल या पाउडर के आकार में तैयार किया जाता है। हींग का सबसे बड़ा उत्पादक अफगानिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान है तो वहीं सबसे बड़ा उपभोक्ता देश भारत है।
भारत कैसे पहुंचा हींग
भारत में हींग के आगमन को लेकर कई तरह के मत दिये जाते हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि मुगल अपने साथ हींग लेकर आए थे। वहीं कुछ ये मत देते हैं के मुगलों से पहले भी कई भारतीय कबीले हींग का इस्तेमाल करते थे। कुछ लोग मानते हैं कि सिकंदर के सैनिक हींग को गलती से दुर्लभ सिल्फियम समझकर अपने साथ सिंधु तक ले आए। लेकिन जब उन्होंने पाया कि यह वह नहीं है तो उसे छोड़ दिया। खैर हींग जहां से भी भारत आई ये भारतीय भोजन का अभिन्न अंग बन गई।

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हींग ने शुरू किया चमड़े के जूतों का कारोबार
जब अकबर भारत की गद्दी पर बैठा तो उसने आगरा में अपनी राजधानी बनाई। अकबर को भी हींग का स्वाद काफी पसंद था। उसने आगरा में ही हींग की मंडी बनवा दी। यह भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी हींग की मंडी थी। तब अफ़गान लोग पहाड़ पर जाते, हींग जमा करके, उन्हें बकरों की खाल में पैक करके आगरा ले आते। आगरा हींग की मंडी में हींग तो बिक जाती लेकिन बकरे की खाल का वह चमड़ा बच जाता था। इस चमड़े को खपाने के लिए धीरे-धीरे जूतों का कारोबार शुरू हुआ। देखते ही देखते ये चमड़े के जूते आगरा की पहचान बन गए।
सिर्फ भारत के लोग खाते हैं हींग
आपको जानकर हैरानी होगी कि भले ही हींग की सबसे ज्यादा पैदावार अफगानिस्तान जैसे देशों में होती है लेकिन वहां के लोग हींग खाते नहीं हैं। हींग कभी भी उनके लिए खाने का सामान नहीं रही। उन्होंने हमेशा इसे पैसे कमाने का जरिया समझा। दुनिया में भारत ही ऐसा देश है जहां हींग का इस्तेमाल खाने में किया जाता है। वहीं अफ्रीका और जमैका में लोग कभी-कभी हींग की ताबीज पहनते थे। वहां मान्यता थी कि हींग की महक भूत प्रेत के साये को दूर रखती है। साल 1918 में जब अमेरिका में स्पैनिश फ्लू का कहर बरपा था तब भी वहां कुछ लोगों ने हींग का पाउच पहना था। आज की तारीख में दुनिया के कई देश ऐसे हैं जहां हींग का इस्तेमाल जौविक खेती में कीटनाशक के तौर पर किया जाता है।
हींग - हिंदू या मुसलमान?
कुछ लोग मसालों को भी हिंदू मुसलमान में बांट चुके हैं। हालांकि ये पूरी तरह से बेतुका है। कुछ मुस्लिम परिवारों का मानना है कि यह हिंदू मसाला है इसलिए वह इसका इस्तेमाल नहीं करते। वहीं कुछ हिंदुओं का मानना है कि हींग की पैदावार से लेकर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक मुसलमान करते हैं इसलिए वह हींद से दूर रहते हैं। ऐसे लोगों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि हींग कितना फायदेमंद है और खाने के स्वाद में चार चांद लगाने वाला है।
