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Eid ka Chand Shayari: यहां देखें 20+ ईद का चांद शायरी, फेसबुक व्हाट्सएप के लिए बेस्ट हैं ईद के चांद पर शायरी

Eid Chand Shayari in Hindi (ईंद का चांद शायरी): जब सूरज ढलता है और आसमान में हल्की-हल्की लाली फैलती है, तब सबकी नजरें उसी तरफ उठ जाती हैं। हर कोई सोचता है कि कहीं से भी दिख जाए बस एक झलक। वह पतला सा चांदी जैसा टुकड़ा दिखते ही ईद मुबारक की आवाजें गूंजने लगती हैं।

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ईद के चांद पर 20+ खूबसूरत शेर

Eid ka chand Mubarak shayari Hindi: रमजान का पाक महीना अपनी समाप्ति के साथ ईद की खुशियां लेकर आ रहा है। हर किसी को ईद के चांद का इंतजार है। ईद का चांद वह खुशी है जो लाखों दिलों को एक साथ जोड़ती है। ईद का चांद इस लिए भी बहुत ख़ास होता है क्यों कि उसे देखने के अगले रोज़ ही ईद का दिन होता है । इस लिए उसे देखने के लिए हर कोई बेक़रार रहता है । उर्दू शायरी में ईद के चाँद को शायरों ने बहुत एहमियत दी है और इसे मुख़्तलि ढंग से बांधा है। आइए पढ़ते हैं ईद के चांद पर लिखे कुछ बेहद खूबूसरत शेर:

Eid ka Chand par Shayari | ईद के चांद पर शायरी 2 लाइन

1. पूछा जो उन से चांद निकलता है किस तरह

ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूं

- आरज़ू लखनवी

2. ईद का चांद तुम ने देख लिया

चांद की ईद हो गई होगी

- इदरीस आज़ाद

3. वो चांद कह के गया था कि आज निकलेगा

तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूं शाम से मैं

- फ़रहत एहसास

4. जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें

ईद के चांद का दीदार बहाना ही सही

- अमजद इस्लाम अमजद

5. देखा हिलाल-ए-ईद तो आया तेरा ख़याल

वो आसमाँ का चांद है तू मेरा चांद है

- अज्ञात

6. ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए

इक चांद फ़लक पर निकला हो इक चांद सर-ए-बाम आ जाए

- अनवर मिर्ज़ापुरी

7. मुझ को मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब

देर से चांद निकलना भी ग़लत लगता है

- अहमद कमाल परवाज़ी

8. माह-ए-नौ देखने तुम छत पे न जाना हरगिज़

शहर में ईद की तारीख़ बदल जाएगी

- जलील निज़ामी

9. ईद के बा'द वो मिलने के लिए आए हैं

ईद का चांद नज़र आने लगा ईद के बा'द

- अज्ञात

10. लुत्फ़-ए-शब-ए-मह ऐ दिल उस दम मुझे हासिल हो

इक चांद बग़ल में हो इक चांद मुक़ाबिल हो

- मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस

11. देखा हिलाल-ए-ईद तो तुम याद आ गए

इस महवियत में ईद हमारी गुज़र गई

- अज्ञात

12. तू आए तो मुझ को भी

ईद का चांद दिखाई दे

- हरबंस सिंह तसव्वुर

13. मुद्दतों बा'द कभी ऐ नज़र आने वाले

ईद का चांद न देखा तिरी सूरत देखी

- मंज़र लखनवी

14. शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं

चांद ने कितनी देर लगा दी आने में

- गुलज़ार

15. छुप गया ईद का चांद निकल कर देर हुई पर जाने क्यों

नज़रें अब तक टिकी हुई हैं मस्जिद के मीनारों पर

- शायर जमाली

16. मेरी तो पोर पोर में ख़ुश्बू सी बस गई

उस पर तिरा ख़याल है और चांद-रात है

- वसी शाह

17. तू न आएगा तो हो जाएँगी ख़ुशियाँ सब ख़ाक

ईद का चांद भी ख़ाली का महीना होगा

- मुज़्तर ख़ैराबादी

18. क्यूं इशारा है उफ़ुक़ पर आज किस की दीद है

अलविदा'अ माह-ए-रमज़ां वो हिलाल-ए-ईद है

- निसार कुबरा अज़ीमाबादी

19. उसी की शक्ल मुझे चांद में नज़र आए

वो माह-रुख़ जो लब-ए-बाम भी नहीं आता

- ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

20. चांद निकला है ब-अंदाज़-ए-दिगर आज की शाम

बारिश-ए-नूर है ता-हद्द-ए-नज़र आज की शाम

- अरमान अकबराबादी

21. निकले हैं घर से देखने को लोग माह-ए-ईद

और देखते हैं अबरू-ए-ख़मदार की तरफ़

- परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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