किताब कैफे(Kitaab Café): 15 अगस्त 1947। भारतीय इतिहास की वो तारीख जब देश आजाद हुआ था। लेकिन क्या भारत उसी दिन एक राष्ट्र भी बन गया था? क्या अंग्रेजों के जाने के बाद पूरा देश अपने आप एक हो गया था? पत्रकार और लेखक जोसी जोसेफ ने अपनी नई किताब Birth of a Nation: The Twenty-One Days That Made India में इसी सवाल का जवाब पाठकों के सामने रखने की कोशिश की है।
किताब कहती है कि भारत का भविष्य 15 अगस्त को तय नहीं हुआ। असली लड़ाई उससे पहले के 21 दिनों में लड़ी गई। यह 21 दिन 25 जुलाई से 14 अगस्त 1947 तक का था। लेखक दावा करते हैं कि इन्हीं 21 दिनों में ऐसे फैसले हुए, जिन्होंने भारत को बिखरने से बचा लिया। यह किताब उन सरकारी बैठकों, गोपनीय दस्तावेजों और राजनीतिक बातचीत को पब्लिक करती है, जो बंद कमरों में चल रही थीं। बाहर देश आजादी का इंतजार कर रहा था। अंदर भारत का नक्शा तैयार हो रहा था।
स्कूल की किताबों में हम महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के बारे में पढ़ते हैं। लेकिन जोसी दोसेफ की यह किताब उन लोगों को भी सामने लाती है, जिनके नाम बहुत कम लोग जानते हैं। इनमें सबसे अहम हैं वी.पी. मेनन। वे सरदार पटेल के सबसे भरोसेमंद अफसर थे। रियासतों के भारत में विलय की पूरी रणनीति तैयार करने में उनकी बड़ी भूमिका थी।
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किताब बताती है कि आजादी के समय भारत में 565 से ज्यादा रियासतें थीं। इन रियासतों के सामने तीन रास्ते थे। भारत में शामिल होना। पाकिस्तान में जाना। या फिर खुद को स्वतंत्र देश घोषित कर देना। अगर बड़ी संख्या में रियासतों ने तीसरा रास्ता चुन लिया होता, तो आज भारत का नक्शा शायद बिल्कुल अलग होता।
जोसी जोसेफ ने इस किताब को सिर्फ घटनाओं के सहारे नहीं लिखा। उन्होंने राष्ट्रीय अभिलेखागार, सरकारी फाइलों और हाल के वर्षों में सार्वजनिक हुए दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। यही वजह है कि किताब कई पुराने मिथकों को चुनौती देती है और इतिहास के कम चर्चित पहलुओं पर रोशनी डालती है।
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किताब की सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ्तार है। यह शोधपरक होने के बावजूद बोझिल नहीं लगती। कई हिस्से किसी राजनीतिक थ्रिलर जैसे लगते हैं। पाठक को महसूस होता है कि वह इतिहास नहीं, घटनाओं को सामने घटते हुए देख रहा है। हालांकि, कुछ जगह लेखक इतने सारे किरदार और घटनाएं एक साथ सामने रखते हैं कि पाठक को थोड़ा ध्यान लगाकर पढ़ना पड़ता है। अगर भारतीय स्वतंत्रता और रियासतों के इतिहास की बुनियादी जानकारी पहले से हो, तो किताब का आनंद और बढ़ जाता है।
तो अगर आपकी रुचि भारतीय इतिहास और हिंदुस्तान के राष्ट्रनिर्माण को जानने में है तो आपके लिए ये किताब फायदेमंद साबित हो सकती है।
