लाइफस्टाइल

एक कहानी, 50 साल: दास्तान उस शख्स की जिसने एक किताब को दे दी अपनी पूरी जिंदगी

आज के डिजिटल दौर में जहां सब कंप्यूटर पर टाइप करते हैं, कारो आज भी पुराने टाइपराइटर पर ही लिखते हैं। वे एक-एक वाक्य को बार-बार बदलते हैं, जब तक कि वह एकदम सही न हो जाए।

Image

पिछले करीब 50 साल से एख ही किताब लिखने में लगे हैं रॉबर्ट तारो

आज हम में से हर कोई जल्दी में है। हर किसी को सबकुछ तुरंत चाहिए। इस जल्दबाजी के दौर में क्या आप ये बात सोच सकते है कि कोई इंसान अपनी जिंदगी के 50 से भी ज्यादा साल एक ही इंसान की कहानी लिखने में लगा दे? जी हां, इस शख्स का नाम है रॉबर्ट कारो। रॉबर्ट अमेरिकी मूल के लेखक हैं।

रॉबर्ट कारो की उम्र आज 89 वर्ष है। वे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन की जीवनी लिख रहे हैं। यह कोई आम किताब नहीं है। यह इतने विस्तार में लिखी गई है कि इसे पढ़कर 20वीं सदी के पूरे अमेरिका का इतिहास समझ आता है।

1982 में शुरू हुआ यह सफर

बात साल 1982 की है। तब रॉबर्ट कारो ने इस बायोग्राफी का पहला भाग 'द पाथ टू पावर' (The Path to Power) नाम से छापा। लोगों को लगा कि यह एक-दो भाग में खत्म हो जाएगी। लेकिन कारो की रिसर्च इतनी गहरी थी कि एक के बाद एक 4 भाग आ चुके हैं। अब तक वे 3,000 से ज्यादा पन्ने लिख चुके हैं।

कहानी जॉनसन के बचपन से शुरू होकर व्हाइट हाउस तक पहुँच चुकी है। लेकिन सफर अभी पूरा नहीं हुआ है। कारो आज भी इस किताब का पांचवां और आखिरी भाग लिखने में जुटे हैं।

किताब के लिए छोड़ दिया अपना शहर

रॉबर्ट कारो की रिसर्च करने का तरीका सबसे अलग है। लोग उन्हें लेखक कम और इतिहास का 'पुरातत्वविद' ज्यादा मानते हैं। वे सिर्फ किताबों या दफ्तरों तक सीमित नहीं रहे।

जॉनसन के बचपन को करीब से समझने के लिए कारो और उनकी पत्नी इना न्यू यॉर्क का आराम छोड़कर टेक्सास के दूर-दराज गांव में जाकर रहने लगे। वे वहां 3 साल तक रहे। उन्होंने वहां के लोगों से बातें कीं, वहां के माहौल को समझा और उस जमीन की गरीबी को महसूस किया। कारो का मानना है कि सत्ता किसी इंसान को बदलती नहीं है, बल्कि उसके असली चेहरे को बाहर लाती है।

टाइपराइटर पर ही करते हैं काम

आज के डिजिटल दौर में जहां सब कंप्यूटर पर टाइप करते हैं, कारो आज भी पुराने टाइपराइटर पर ही लिखते हैं। वे एक-एक वाक्य को बार-बार बदलते हैं, जब तक कि वह एकदम सही न हो जाए।

उनकी इस मेहनत को दुनिया ने सलाम किया है। इस सीरीज की तीसरी किताब 'मास्टर ऑफ द सेनेट' के लिए उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित 'पुलित्ज़र पुरस्कार' से नवाजा जा चुका है।

रॉबर्ट कारो का ये जज्बा सिखाता है कि कोई भी महान काम संपूर्ण होने के लिए समय और सब्र मांगती है। 50 साल बाद भी उनकी यह लगन हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। पाठकों को अब उनकी किताब के पांचवें और आखिरी भाग का इंतजार है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article