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Shayari on Eyes: इन आंखों की मस्ती के..., इन खूबसूरत शायरी के जरिए करें आंखों की तारीफ

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated May 3, 2023, 07:43 AM IST

Shayari in Hindi on Eyes, आंखों पर शायरी: प्यार का इजहार करना हो या फिर लफ्जों को बयां करना हो आंखों का अहम रोल होता है। आंखों की तारीफ दिल छू जाती है। दुनिया के हर नामचीन शायर ने अपनी भाषा में आंखों की तारीफ की है। यहां पढ़ें आंखों पर कहे गए मशहूर शेर-

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Shayari on eyes

Shayari in Hindi on Eyes, आंखों पर शायरी: "शब्दों को अधरों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो, मैं आँखों से सुन सकता हूंं तुम आंखों से बोलो"..., मशहूर अभिनेता आशुतोष राणा ने आंखों के महत्व को बताते हुए इन पंक्तियों को लिखा है। मनोज मुंतशिर लिखते हैं- मेरी आंखों में बादल रहने दो न.. मुबारक़ हो तुम्हे ये दुनियादारी, मैं पागल हूं तो पागल रहने दो। प्यार का इजहार करना हो या फिर लफ्जों को बयां करना हो आंखों का अहम रोल होता है। अगर आंखों को इंसान के ख्वाबों और ख्यालों का आईना कहें तो शायद गलत न होगा। आंखों की तारीफ दिल छू जाती है। शायरों और कवियों ने भी आंखों पर काफी कुछ लिखा है। दुनिया के हर नामचीन शायर ने अपनी भाषा में आंखों की तारीफ की है। यहां पढ़ें आंखों पर कहे गए मशहूर शेर-

Aankhon Per Shayari

हसीं तेरी आंखें हसीं तेरे आंसू

यहीं डूब जाने को जी चाहता है

(जिगर मुरादाबादी)

देखी हैं बड़े ग़ौर से मैं ने वो निगाहें

आंखों में मुरव्वत का कहीं नाम नहीं है

(जलील मानिकपूरी)

आंखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमां हो

नजरों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है

(जां निसार अख्तर)

इस क़दर रोया हूं तेरी याद में

आईने आंखों के धुदले हो गए

(नासिर काजमी)

आ जाए न दिल आप का भी और किसी पर

देखो मिरी जां आंख लड़ाना नहीं अच्छा

(भारतेंदु हरिश्चंद्र)

जो उन मासूम आँखों ने दिए थे

वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ

(फिराक गोरखपुरी)

शबनम के आंसू फूल पर ये तो वही किस्सा हुआ

आंखें मिरी भीगी हुई चेहरा तिरा उतरा हुआ

(बशीर बद्र)

मैं ने चाहा था कि अश्कों का तमाशा देखूं

और आंखों का खजाना था कि ख़ाली निकला

(साकी फारुकी)

खुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से

फरिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

(खुमार बाराबंकवी)

दिलों का जिक्र ही क्या है मिलें मिलें न मिलें

नजर मिलाओ नजर से नजर की बात करो

(सूफी तबस्सुम)

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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