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आज की शायरी: जीवन में सही इंसान के होने की अहमियत सिखाता है सुरूर बाराबंकवी का यह शेर

Aaj ki Shayari (आज की शायरी): जिंदगी की खूबसूरती घटनाओं में नहीं, इंसानों में छुपी होती है। अगर हमारी मुलाकात ऐसे लोगों से हो जाए, तो जिंदगी से शिकायतें कम और मोहब्बत ज्यादा हो जाती है। यही बात सुरूर बाराबंकवी का यह शेर बताता है। इस शेर का सबसे बड़ा संदेश ये है कि जिंदगी से इश्क मुमकिन है, बस सही इंसान मिल जाए।

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आज की शायरी (Aaj ki Shayari)

Shayari of the Day: सुरूर बाराबंकवी उर्दू शायरी के उन अहम नामों में शुमार हैं, जिनकी गजलों में मोहब्बत, इंसानियत और जिंदगी की गहरी समझ झलकती है। उनका असली नाम अशरफ अली था और उनका ताल्लुक उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से था, इसी वजह से वे बाराबंकवी कहलाए। उनकी शायरी बनावटी भावनाओं से दूर, सीधे दिल को छूने वाली होती थी।

सुरूर बाराबंकवी ने आम इंसान के जज्बात, रिश्तों की नजाकत और जिंदगी के उतार-चढ़ाव को बेहद सादगी से शब्दों में ढाला। फिल्मी दुनिया में भी उनका योगदान अहम रहा। उन्होंने कई यादगार गीत लिखे, जो आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। उर्दू के मुकम्मल शायरों में शुमार सुरूर बाराबंकवी का एक बड़ा मशहूर शेर हैं:

जिन से मिल कर ज़िंदगी से इश्क़ हो जाए वो लोग

आप ने शायद न देखे हों मगर ऐसे भी हैं

यह शेर जिंदगी के उन अनमोल रिश्तों और मुलाकातों की बात करता है, जो इंसान के भीतर जीवन के प्रति प्रेम जगा देती हैं। इस शेर में सुरूर बाराबंकवी कहते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जिनसे एक बार मिल लेने के बाद ज़िंदगी बोझ नहीं, बल्कि इश्क लगने लगती है। उनकी मौजूदगी, उनका व्यवहार और उनकी सोच इंसान के दिल में जीने की नई चाह पैदा कर देती है। ऐसे लोग जिंदगी को देखने का नजरिया बदल देते हैं।

शेर का पहला मिसरा है - जिन से मिल कर जिंदगी से इश्क़ हो जाए। यहां समझना चाहिए कि जिंदगी से मोहब्बत कोई जन्मजात भावना नहीं होती। अकसर जीवन की कठिनाइयां, संघर्ष और निराशाएं इंसान को थका देती हैं। लेकिन जब किसी ऐसे इंसान से मुलाकात होती है जो सादगी, सकारात्मकता और संवेदनशीलता से भरा होता है, तो जिंदगी फिर से खूबसूरत लगने लगती है। ऐसे लोग हमें यह एहसास दिलाते हैं कि जीवन सिर्फ जिम्मेदारियों और दुखों का नाम नहीं, बल्कि महसूस करने, मुस्कुराने और जुड़ने का भी नाम है।

शेर का दूसरा मिसरा कहा है- आप ने शायद न देखे हों मगर ऐसे भी हैं। यहां सुरूर बाराबंकवीबड़ी विनम्रता से यह स्वीकार करते हैं कि हो सकता है पाठक या श्रोता ने ऐसे लोगों से कभी मुलाकात न की हो। यह पंक्ति निराशा भी समेटे हुए है और उम्मीद भी। निराशा इस अर्थ में कि ऐसे लोग बहुत कम होते हैं और उम्मीद इसलिए कि वे कहीं न कहीं मौजूद हैं। यह शेर हमें विश्वास दिलाता है कि दुनिया पूरी तरह स्वार्थी या बेरुखी से भरी नहीं है।

इस शेर में एक गहरी मानवीय सच्चाई छुपी है। हर इंसान अपने जीवन में ऐसे किसी व्यक्ति की तलाश करता है, जिसकी संगत में उसे खुद से और जिंदगी से प्यार हो जाए। ये लोग कोई बड़े उपदेशक या महान हस्ती नहीं होते, बल्कि साधारण से इंसान होते हैं, जो बिना शर्त अपनापन देते हैं, जो दुख में भी मुस्कान बांटते हैं और जिनकी मौजूदगी मात्र से जीवन हल्का लगने लगता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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