No extension on UPI MDR: केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि UPI MDR को 15 अक्टूबर से ही लागू किया जाएगा। इस डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, अगले महीने होने वाली GST काउंसिल की बैठक में इस चार्ज पर लगने वाले 18% GST की समीक्षा की जा सकती है।
अगले महीने यानी 7 अक्टूबर को GST काउंसिल की बैठक होनी है। इस बैठक के आधिकारिक एजेंडा में MDR पर GST का मुद्दा शामिल नहीं है। लेकिन, मनीकंट्रोल एक रिपोर्ट के मुताबिक काउंसिल में इस मुद्दे पर चर्चा और फैसला हो सकता है।
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब MDR का व्यापक विरोध हो रहा है। खासतौर पर व्यापारियों का कहना है कि MDR की वजह से UPI की ओवरऑल ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ गई है। इस कॉस्टिंग का असर आखिर में उनके प्रॉफिट्स और मार्जिन को इतना ज्यादा प्रभावित कर सकता है कि उनके लिए व्यापार में टिके रहने में मुश्किलें आ सकती हैं।
हालांकि, तमाम विरोध के बाद भी सरकार ने इस फैसले मजबूती से बचाव किया है। सरकार की दलील है कि तकरीबन 96% यूपीआई ट्रांजैक्शन MDR के दायरे में नहीं आते हैं। इसके साथ ही सरकार का कहना है कि यह चार्ज UPI इकोसिस्टम को चालने और मेंटेन करने के लिए जरूरी है। इसके अलावा अधिकारियों का दावा है कि MDR लगाने के बाद भी UPI को चलाने की 100 फीसदी कॉस्ट नहीं निकल सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि MDR की रेट इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत के बाद तय किया गया है।
नए फ्रेमवर्क के तहत 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लगाना प्रस्तावित है। इसके अलावा अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक लगेगा।
इसके साथ ही सरकार ने फिर से यह साफ किया है कि UPI MDR लोगों के आपस में ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा, बल्कि सिर्फ मर्चेंट पेमेंट पर लगेगा और इसे ग्राहक को नहीं चुकाना होगा, बल्कि यह मर्चेंट की तरफ से कटेगा।
MDR पर GST काउंसिल कर सकती है चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अधिकारियों ने संभावना जताई है कि 7 अक्टूबर को होने वाली GST Council की बैठक में UPI MDR पर लगने वाले 18% GST को हटाया जा सकता है। क्योंकि, सरकार चाहती है कि काउंसिल इस मुद्दे पर चर्चा करे और सकारात्मक फैसला ले।
व्यापारियों को क्या नुकसान?
GST के नियमों के मुताबिक वस्तुओं से जुड़े व्यापार के मामले में 40 लाख रुपये और सेवाओं से जुड़े कारोबार के मामले में 20 लाख रुपये सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को GST रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होता है। लेकिन, वे GST का इनपुट क्रेडिट भी नहीं ले पाते हैं। ऐसे में जिन व्यापारियों का GST रजिस्ट्रेशन नहीं है, वे MDR पर लगे वाले GST पर इनपुट क्रेडिट नहीं ले पाएंगे।
