Aaj Ki Shayari: अधूरे इश्क और टूटे रिश्तों की टीस को कम करता है साहिर लुधियानवी का ये शेर
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Dec 19, 2025, 10:01 AM IST
Aaj Ki Shayari (आज की शायरी): आज के दौर में साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) का यह शेर टूटते रिश्तों, अधूरे प्यार और अधूरे सपनों पर बिल्कुल सटीक बैठता है। यह हमें सिखाता है कि हर चीज को हासिल करना जरूरी नहीं, कुछ चीजों को गरिमा के साथ छोड़ देना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत होती है।
Aaj Ki Shayari: अधूरे इश्क और टूटे रिश्तों की टीस को कम करता है साहिर लुधियानवी का ये शेर
Shayari of The Day: साहिर लुधियानवी हिंदी और उर्दू शायरी के उन दुर्लभ फनकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी कलम से इंसानी एहसास के सारे रंग उतारे। 8 मार्च 1921 को लुधियाना में जन्मे साहिर की रचनाओं में प्रेम है, लेकिन वह सिर्फ निजी प्रेम तक सीमित नहीं रहता। उसमें इंसानियत, बराबरी और इंसानी दर्द की व्यापक संवेदना शामिल है। उनकी शायरी व्यवस्था से सवाल करती है, सत्ता के पाखंड को उजागर करती है और आम आदमी की पीड़ा को आवाज देती है। साहिर की भाषा सरल, सीधी और असरदार थी। वे अपनी शायरी की शब्दों से सजावट नहीं करते थे। वह तो उन्हें सच्चाई और साफगोई से रचते थे। उनके कई मशहूर शेर लोगों की जुबान पर हैं। फिलहाल आज की शायरी में पढ़ते हैं उनका मशहूर शेर:
"वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक खूबसूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा"
यह शेर जिंदगी और रिश्तों की गहरी सच्चाई को बेहद नर्म लेकिन असरदार अंदाज में बयां करता है। साहिर ने अपने इस शेर के जरिए बताया है कि हर कहानी का अंत खुशहाल या मुकम्मल हो, यह जरूरी नहीं। कुछ सफर ऐसे होते हैं जिन्हें पूरा करना हमारे बस में नहीं होता, चाहे चाहत कितनी ही सच्ची क्यों न हो।
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
इस शेर का पहला हिस्सा उस अधूरी कहानी की ओर इशारा करता है, जिसे हम जानते हैं कि अंत तक ले जाना संभव नहीं है। इंसान अकसर ऐसे अफसानों को जिद में घसीटता रहता है, उम्मीद करता है कि शायद आखिर में सब ठीक हो जाए। लेकिन साहिर समझदारी की बात करते हैं।
उसे इक खूबसूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
शेर की दूसरी पंक्ति जीवन दर्शन सिखाती है। वह कहती है कि अगर अंत दुखद या विनाशकारी होना तय है, तो बेहतर है कि कहानी को एक खूबसूरत मोड़ पर ही रोक दिया जाए। इसका मतलब है कि सम्मान, यादों और आत्मसम्मान को बचाते हुए पीछे हट जाना चाहिए। हर रिश्ते या सपने को टूटने की हद तक खींचना जरूरी नहीं होता।
यह शेर हमें यह भी सिखाता है कि किसी चीज को छोड़ना या पीछे हट जाना किसी भी तरह से हार नहीं है। कई बार यह सबसे बड़ी समझदारी मान जाती है। खूबसूरत मोड़ देना मतलब कड़वाहट, शिकायत और नफरत से पहले ही दूरी बना लेना। ताकि जब पीछे मुड़कर देखें, तो दर्द के साथ-साथ मुस्कान भी बची रहे।
आज के दौर में यह शेर टूटते रिश्तों, अधूरे प्यार और अधूरे सपनों पर बिल्कुल सटीक बैठता है। यह हमें सिखाता है कि हर चीज को हासिल करना जरूरी नहीं, कुछ चीजों को गरिमा के साथ छोड़ देना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत होती है।
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