आज का सुविचार: जमाने में वही लोग हम पर उंगली उठाते हैं, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Jan 11, 2026, 09:51 AM IST
Aaj ka Suvichar: आज के इस सुविचार से हमें यही सीख लेनी चाहिए कि ऊंचाई पर पहुंचने वालों पर पत्थर नीचे से ही फेंके जाते हैं। इसलिए उंगली उठाने वालों से परेशान होने के बजाय, अपने रास्ते पर डटे रहें। आपकी जीत निश्चय है।
Aaj ka Suvichar (आज का सुविचार)
Aaj ka Suvichar (आज का सुविचार): हर किसी के जीवन में प्रेरणा की जरूरत होती है। जब किसी काम को करने में असफलता या फिर जगहंसाई का डर सताने लगता है तो यही प्रेरणा हमें आगे बढ़ने का हौसला देते हैं। यह प्रेरणा हमें किसी से भी मिल सकती है। किसी शख्स से, पेड़-पशु से या फिर किसी के विचारों से। आज के सुविचार में हम नजर डालते हैं ऐसे ही एक प्रेरक विचार पर:
"जमाने में वही लोग हम पर उंगली उठाते हैं, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती"
यह प्रेरक विचार जीवन की एक कड़वी लेकिन सच्ची हकीकत को उजागर करता है। अकसर देखा जाता है कि जो लोग खुद कुछ हासिल नहीं कर पाते, वही दूसरों की मेहनत, सफलता और पहचान पर सवाल उठाते हैं। ऐसे लोगों का 'उंगली उठाना' केवल आरोप लगाना या आलोचना करना भर नहीं है। यह आपके लिए उनकी ईर्ष्या, हीन भावना और असुरक्षा की भावना को भी जाहिर करता है।
यह प्रेरक विचार कहता है कि जिन लोगों में सामने आकर बराबरी करने की क्षमता नहीं होती, वे दूर खड़े होकर आलोचना का सहारा लेते हैं। वे जानते हैं कि वे किसी की जगह नहीं ले सकते, उसकी मेहनत तक नहीं पहुंच सकते, इसलिए शब्दों के जरिए चोट पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोग आपकी तरक्की से परेशान होते हैं, क्योंकि आपकी सफलता उन्हें अपनी असफलताओं का एहसास दिलाती है।
यह विचार हमें यह भी सिखाता है कि हर आलोचना को गंभीरता से लेना जरूरी नहीं होता। जब आप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, कुछ अलग करते हैं या समाज की तय सीमाओं से बाहर निकलते हैं, तो आलोचना स्वाभाविक है। आलोचक दरअसल आपकी प्रगति का प्रमाण होते हैं। अगर आप महत्वहीन होते, तो शायद कोई आप पर ध्यान भी नहीं देता।
आज का यह सुविचार आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को मजबूत करने की सीख देता है। यह हमें बताता है कि दूसरों की राय से ज्यादा जरूरी अपनी मेहनत और ईमानदारी पर भरोसा करना है। जब हम खुद को पहचान लेते हैं, तब निंदा या ताने हमें कमजोर नहीं कर पाते।
अंत में इस विचार से हमें यही सीख लेनी चाहिए कि ऊंचाई पर पहुंचने वालों पर पत्थर नीचे से ही फेंके जाते हैं। इसलिए उंगली उठाने वालों से परेशान होने के बजाय, अपने रास्ते पर डटे रहें। आपकी जीत निश्चय है।
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