नॉलेज

क्या होता है कोएक्सियल हेलीकॉप्टर? जिसके ऊपर एक साथ लगे होते हैं दो पंखे

हेलीकॉप्टर कई प्रकार के होते हैं, जिसमें से एक होता है- कोएक्सियल हेलीकॉप्टर, कोएक्सियल हेलीकॉप्टर के ऊपर एक नहीं बल्कि दो पंखे लगे होते हैं। इसके पिछले हिस्से में कोई पंखा नहीं लगा होता है।

coaxial helicopter.

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर में एक ही धुरी पर क्यों लगे होते हैं दो रोटर

जिन हेलीकॉप्टर्स से आसमान में यात्रा की जाती है, वो आमतौर पर एक ही जैसे होते हैं, जिसमें एक पंखा यानि कि एक रोटर हेलीकॉप्टर के ऊपर लगा होता है, जिसमें तीन पंख होते हैं, दूसरा एक पंखा हेलीकॉप्टर के पिछले हिस्से में होता है। लेकिन कभी-कभी आसमान में कुछ ऐसे हेलीकॉप्टर उड़ते हुए भी दिखते हैं, जिसमें ऊपर ही दो पंखे लगे होते हैं। ऐसा क्यों? हेलीकॉप्टर के ऊपर दो पंखे लगाने से क्या फायदा होता है? क्या उसकी गति बढ़ जाती है, भार क्षमता बढ़ जाती है? अगर ऐसा है तो फिर बाकी हेलीकॉप्टर्स के ऊपर एक ही पंखा क्यों लगा होता है?

किस हेलीकॉप्टर में लगे होते हैं एक साथ दो पंखे?

हेलीकॉप्टर चाहे यात्री सेवा के लिए हो या फिर मिलिट्री सेवा के लिए, इसमें कई प्रकार होते हैं। उसी में एक प्रकार होता है- कोएक्सियल हेलीकॉप्टर (coaxial helicopter)। इसी टेक्नोलॉजी के हेलीकॉप्टर के ऊपर में एक साथ दो पंखे लगे होते हैं, दोनों में 3+3, यानि कि 6 विग्स होते हैं। ये दोनों ही पंखे घूमते तो एक साथ हैं, लेकिन एक दिशा में नहीं घूमते। दोनों एक-दूसरे के विपरीत घूमते हैं।

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर के पंखे किस दिशा में घूमते हैं?

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर के पंखे अलग-अलग दिशा में घूमते थे, हालांकि दोनों एक वर्टिकल एक्सिस पर फिक्स होते हैं। लेकिन जब हेलीकॉप्टर का इंजन चालू होता है और पंखा घूमने लगता है तो दोनों एक दूसरे के विपरीत घूमने लगे हैं। ऊपर लगा हुआ रोटर जहां घड़ी की दिशा (clockwise) में घूमता है तो वहीं नीचे लगा रोटर घड़ी की उल्टी दिशा (anti clockwise) में घूमता है।

coaxial helicopter civil

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर (फोटो- AI Copilot)

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर में एक ही एक्सिस पर दो रोटर क्यों?

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर में एक ही एक्सिस पर दो रोटर लगाने की जरूरत एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल- दोनों वजहों से पड़ती है। कोएक्सियल हेलीकॉप्टर में टेल रोटर नहीं होता है, जिससे उसे टॉर्क को खत्म करने के लिए एक ही एक्सिस पर दो रोटर लगाए जाते हैं। इसे इस तरह से समझिए कि हेलीकॉप्टर के उड़ने में टॉर्क का खत्म होना सबसे महत्वपूर्ण होता है। आम हेलीकॉप्टर जिनमें ऊपर और पीछे पंखे लगे होते हैं। उसमें से ऊपर वाला जब रोटर चलता है तो हेलीकॉप्टर का धड़ उल्टी दिशा में घूमने लगता है, इसे टॉर्क इफेक्ट कहते हैं। इसे रोकने के लिए उसके टेल पर एक रोटर लगा होता है। कोएक्सियल सिस्टम में ऊपर-नीचे लगे दो रोटर विपरीत दिशाओं में घूमते हैं, जिससे एक रोटर का टॉर्क दूसरे से खत्म हो जाता है। इसलिए टेल रोटर की जरूरत नहीं पड़ती।

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर की लिफ्ट करने की खासियत

एक ही एक्सिस पर दो रोटर होने से सीमित जगह में अधिक लिफ्ट भी मिलती है। दोनों रोटर मिलकर हवा को नीचे की ओर धकेलते हैं, जिससे कम डायमीटर में ही ज्यादा उठाने की क्षमता हासिल हो जाती है। यही कारण है कि यह डिजाइन जहाजों के डेक, पहाड़ी इलाकों और तंग जगहों पर संचालन के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।

कोएक्सियल रोटर सिस्टम से हेलीकॉप्टर को मिलती है स्थिरता

कोएक्सियल रोटर सिस्टम हेलीकॉप्टर को बेहतर स्थिरता और नियंत्रण भी देता है। तेज हवाओं या कठिन उड़ान परिस्थितियों में यह डिजाइन ज्यादा संतुलित रहता है और पायलट को दिशा और गति पर अधिक सटीक नियंत्रण मिलता है। सैन्य उपयोग में, जहां तेजी से मैनूवर करना और स्थिर प्लेटफॉर्म बनाए रखना जरूरी होता है, यह बड़ी भूमिका निभाता है।

helicopter

सिंगल रोटर हेलीकॉप्टर (फोटो- canva)

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर में टेल रोटर न होने से फायदा

टेल रोटर न होने से शक्ति की बचत होती है और संरचना भी अपेक्षाकृत कॉम्पैक्ट रहती है। इससे न केवल ईंधन दक्षता बढ़ती है, बल्कि टेल रोटर से जुड़े हादसों और रखरखाव की समस्याएं भी कम हो जाती हैं। इसी वजह से रूसी कामोव जैसे हेलीकॉप्टर निर्माताओं ने कोएक्सियल रोटर डिजाइन को व्यापक रूप से अपनाया है।

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर की कमियां

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर की एक बड़ी कमी इसका जटिल मैकेनिज्म है, क्योंकि एक ही धुरी पर लगे ऊपर-नीचे के दो रोटरों को संतुलित रखना तकनीकी रूप से काफी कठिन होता है। इसके अलावा, कोएक्सियल सिस्टम और गियरबॉक्स की संरचना जटिल होने के कारण इसका रखरखाव भी मुश्किल और महंगा पड़ता है। दोनों रोटर बहुत पास-पास घूमते हैं, जिससे ब्लेड के आपसी टकराव का खतरा बना रहता है और इसे रोकने के लिए अत्यंत सटीक व उन्नत डिजाइन की आवश्यकता होती है।

coaxial helicopter

सैन्य कोएक्सियल हेलीकॉप्टर (AI- Copilot)

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किस-किस देश में

कोएक्सियल हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल दुनिया की कुछ गिनी-चुनी सेनाएं करती हैं, लेकिन इसमें रूस सबसे आगे है। रूस की सेना और नौसेना लंबे समय से कोएक्सियल तकनीक का उपयोग कर रही है। कामोव डिजाइन ब्यूरो के Ka-52, Ka-50, Ka-27, Ka-31 जैसे हेलीकॉप्टर रूसी थलसेना और नौसेना की रीढ़ माने जाते हैं। चीन ने भी इस तकनीक को अपनाया है। भारत की नौसेना कोएक्सियल हेलीकॉप्टरों का उपयोग करती है। भारतीय नौसेना के बेड़े में Ka-28 और Ka-31 जैसे रूसी कोएक्सियल हेलीकॉप्टर शामिल हैं, जो पनडुब्बी रोधी और निगरानी भूमिकाओं में तैनात हैं। मिस्र और अल्जीरिया जैसी कुछ अन्य देशों की सेनाएँ भी रूसी मूल के कोएक्सियल हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करती हैं, खासकर नौसैनिक अभियानों के लिए।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमार author

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय ... और देखें

End of Article