हेलीकॉप्टर में ईंधन उसकी पिछले हिस्से में स्टोर होता है। हेलीकॉप्टर में जहां पायलट या यात्री बैठते हैं, उसके बाद के हिस्से में तेल की टंकी लगाई जाती है। इसी में तेल भरा जाता है जो पाइप के जरिए इंजन तक पहुंचता है।
हेलीकॉप्टर में आमतौर पर दो फ्यूल टैंक होते हैं, ये हेलीकॉप्टर की क्षमता पर निर्भर करता है। दो फ्यूल टैंक की मदद से हेलीकॉप्टर में तेल संग्रह करने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे वो ज्यादा दूरी कवर करने में सक्षम होता है।
अधिकांश हेलीकॉप्टरों में एक से अधिक फ्यूल टैंक होते हैं। इन्हें जानबूझकर अलग-अलग स्थानों पर लगाया जाता है ताकि उड़ान के दौरान वजन का संतुलन बना रहे और सुरक्षा बढ़ाई जा सके। आमतौर पर ये टैंक हेलीकॉप्टर के पोर्ट और स्टारबोर्ड साइड पर लगाए जाते हैं, जिससे किसी एक टैंक में खराबी आने की स्थिति में भी विमान की स्थिरता और ईंधन आपूर्ति प्रभावित न हो। इससे उड़ान की विश्वसनीयता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होती हैं।
लंबी दूरी की उड़ानों के लिए कुछ हेलीकॉप्टरों में अतिरिक्त बाहरी फ्यूल टैंक भी लगाए जा सकते हैं। ये एक्सटर्नल टैंक हेलीकॉप्टर के ढांचे के बाहर विशेष रूप से फिट किए जाते हैं, जिससे ईंधन क्षमता बढ़ती है और उड़ान की रेंज में उल्लेखनीय इजाफा होता है। जरूरत न होने पर इन्हें हटाया भी जा सकता है, जिससे मिशन के अनुसार हेलीकॉप्टर की कॉन्फिगरेशन बदली जा सके।
हेलीकॉप्टर में इस्तेमाल होने वाला ईंधन उसके इंजन की तकनीक पर निर्भर करता है। अलग-अलग प्रकार के इंजनों के लिए अलग ईंधन तय किया गया है, ताकि इंजन की क्षमता और सुरक्षा बनी रहे। इसमें मुख्य रूप से दो प्रकार के तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
टरबाइन इंजन से लैस हेलीकॉप्टर आमतौर पर केरोसिन आधारित जेट फ्यूल—जैसे Jet A या Jet A-1-का उपयोग करते हैं। वहीं, आकार में छोटे और पिस्टन इंजन वाले हेलीकॉप्टर एविएशन गैसोलीन (AvGas 100LL) पर चलते हैं, जिसमें लेड की मात्रा होती है। चूंकि आज के समय में अधिकतर बड़े और आधुनिक हेलीकॉप्टर टरबाइन इंजन से सुसज्जित होते हैं, इसलिए जेट ईंधन का ही सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है।
हेलीकॉप्टर के फ्यूल टैंक का आकार हेलीकॉप्टर के प्रकार, आकार और उसके उपयोग पर निर्भर करता है। हल्के और प्रशिक्षण या निजी इस्तेमाल वाले हेलीकॉप्टरों में फ्यूल टैंक आमतौर पर 150 से 300 लीटर तक का होता है। इससे वे सीमित दूरी और कम समय की उड़ान भर पाते हैं। भारी और लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टरों में फ्यूल टैंक 1,500 लीटर से लेकर 3,000 लीटर या उससे भी अधिक क्षमता का हो सकता है।