NASA Moon Base Mission: अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर आधी सदी पुराना इतिहास दोहराया जा रहा है। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चंद्रमा पर इंसानी बेस कैंप बनाने और एस्ट्रोनॉट्स को लैंड कराने के अपने महत्वाकांक्षी 'आर्टेमिस प्रोग्राम' की रफ्तार दोगुनी कर दी है। नासा प्रशासक जारेड इसाकमैन ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतरिक्ष एजेंसी अब अंतहीन बैठकों और नौकरशाही की सुस्ती को दरकिनार कर 1968 से 1972 वाले 'अपोलो युग' की आक्रामक कार्यशैली अपना रही है। नासा के मुताबिक, इंसान को एक बार फिर चांद पर उतारने का सबसे महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित मिशन 'आर्टेमिस IV' साल 2028 के लिए तय किया गया है।
'आर्टेमिस III': पृथ्वी की कक्षा में एलन मस्क और जेफ बेजोस के लैंडर्स का 'सुपर टेस्ट'
अपोलो मिशन के बाद इंसानों को सीधे चांद पर भेजने में कोई खतरा न रहे, इसके लिए नासा ने एक बेहद चालाक और सुरक्षित रणनीति तैयार की है। अगले साल लॉन्च होने वाले आर्टेमिस III मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री होंगे, जिनमें तीन नासा के और एक इटली के एस्ट्रोनॉट शामिल हैं। यह दो हफ्ते का मिशन होगा जो चांद पर जाने के बजाय पृथ्वी की कक्षा में ही रुकेगा। केप कैनवेरल से एक के बाद एक तीन रॉकेट छोड़े जाएंगे। एस्ट्रोनॉट्स अपने ओरियन यान में सवार होकर सबसे पहले जेफ बेजोस की कंपनी 'ब्लू ओरिजिन' के 'ब्लू मून' लैंडर से डॉक करेंगे यानी जुड़ेंगे। इसके बाद ओरियन यान एलन मस्क की 'SpaceX' के विशालकाय 'स्टारशिप' लैंडर से जुड़ेगा। नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर अमित क्षत्रिय ने इस जटिल डॉकिंग टेस्ट पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "रॉकेट नर्ड होने के नाते, यह देखना बेहद शानदार और खौफनाक होगा।"

आर्टेमिस-III मिशन के लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के रॉकेट बूस्टर (AP Via NASA)
चीन से 'न्यू स्पेस रेस': 9 महीने में अपोलो 7 से 11 का फॉर्मूला
नासा प्रशासक जारेड इसाकमैन का कहना है कि आज का दौर भी अपोलो काल जैसा ही है, बस अंतर यह है कि तब मुकाबला सोवियत संघ (USSR) से था और आज चीन (China) के साथ है। इसाकमैन ने केनेडी स्पेस सेंटर में कहा कि "यह कोई टेक इंडस्ट्री की जादुई तरकीब या नई मैनेजमेंट फिलॉसफी नहीं है। यह हमारा अपना इतिहास है। यह वही प्लेबुक है जिसे नासा बखूबी जानता है, वही प्लेबुक जिसके दम पर हमने अपोलो-7 की लैंडिंग से लेकर अपोलो-11 के जरिए चांद पर कदम रखने का सफर महज 9 महीनों में पूरा कर लिया था।"
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर रोवर और 'मून कार' करेगी इंसानों का इंतजार
अपोलो मिशन चांद के विषुवत रेखा के आसपास उतरे थे, लेकिन नासा का नया निशाना चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव (South Pole) है, जहां हमेशा अंधेरा रहने वाले गड्ढों में भारी मात्रा में बर्फ होने की संभावना है। पिट्सबर्ग की प्राइवेट कंपनी इसी साल के अंत तक दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर और रोवर भेजने का दूसरा प्रयास करेगी। जब 2028 में 'आर्टमिस IV' के मूनवॉकर्स चांद की जमीन पर कदम रखेंगे, तो उनकी सवारी यानी 'मून कार' (Lunar Terrain Vehicle) वहां पहले से ही खड़ी मिलेगी। जोखिम कम करने के लिए शुरुआती मूनवॉकर्स भारी-भरकम सूट के बजाय एक हल्का और कम जटिल 'सॉर्टी सूट' पहनेंगे, जिसे एक्सिओम स्पेस तैयार कर रही है और अगले साल इसका परीक्षण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर होगा। चांद पर केवल जाकर लौट आना ही मकसद नहीं है, बल्कि वहां लंबे समय तक इंसानी उपस्थिति दर्ज कराना असल चुनौती है। आने वाले दो साल अंतरिक्ष विज्ञान और मानव इतिहास के पन्नों में सबसे रोमांचक अध्याय लिखने वाले हैं, जहां प्राइवेट स्पेस एजेंसियों की रेस और नासा का आक्रामक रुख भारत और पूरी दुनिया की नजरों में बना हुआ है।
