रामायण, विजयनगर साम्राज्य और यूनेस्को विश्व धरोहर तक, जानें भारत के इस रहस्यमयी शहर का इतिहास
- Authored by: Nilesh Dwivedi
- Updated Jan 20, 2026, 04:44 PM IST
भारत के शहर केवल जगह नहीं, बल्कि समय के साथ चलती जीवंत कहानियां हैं। यहां की गलियों में लोग ही नहीं, इतिहास, परंपराएं और अनकहे किस्से भी साथ चलते हैं। कभी मंदिरों की घंटियों में आस्था गूंजती है, तो कहीं किलों की दीवारें बीते युगों की दास्तान सुनाती हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक शहर से परिचित कराने जा रहे हैं, जिसकी जड़ें सदियों पुरानी हैं और जिनका संबंध रामायण काल तक जाता है।
क्या यहीं थी रामायण की किष्किंधा?
Hampi History: भारत का हर शहर एक जीवंत कहानी है, जिसे पढ़ने और समझने निकलो तो शायद एक पूरी उम्र भी कम पड़ जाए। यहां की गलियों में सिर्फ लोग नहीं चलते, बल्कि इतिहास, परंपराएं और अनकही दास्तानें भी साथ-साथ बहती रहती हैं। हर कस्बा, हर मोहल्ला, हर चौराहा किसी न किसी विरासत और रहस्यमयी तथ्य से जुड़ा हुआ है, जो समय के साथ और गहरा होता गया है। कहीं प्राचीन मंदिरों की घंटियों में सदियों पुरानी आस्था की गूंज सुनाई देती है, तो कहीं पुराने किलों की दीवारें युद्धों, प्रेम और बलिदान की कहानियां बयां करती हैं। छोटे-से गांव में भी ऐसी लोक कथाएं मिल जाती हैं, जो पीढ़ियों से ज़ुबान दर ज़ुबान आगे बढ़ती आई हैं। भारत की विविधता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। आज हम आपको जिस शहर से रूबरू करवाने जा रहे हैं, उसका इतिहास कई सौ साल पुराना माना जाता है, या ये कह सकते हैं कि इसका सीधा संबंध रामायण काल से भी है। तो आइए जानें इसके बारे में बेहद करीब से.....

ये है प्राचीन शहर का नाम
क्या है शहर का नाम?
कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित हम्पी एक छोटा सा नगर है, जो अपने गौरवशाली अतीत और अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यह जगह सिर्फ ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पौराणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इसके इतिहास की झलक लगभग 238 ईसा पूर्व से मिलती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हम्पी का संबंध रामायण काल से जोड़ा जाता है। वहीं कुछ कथाओं में इस स्थान को भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा हुआ भी बताया गया है। इतिहास की दृष्टि से, विजयनगर साम्राज्य के शक्तिशाली शासकों ने हम्पी था। 14वीं शताब्दी में यह विजयनगर साम्राज्य की राजधानी बना और कला, संस्कृति व व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा। लेकिन 16वीं शताब्दी में हुए आक्रमणों के कारण यह समृद्ध नगर उजड़ गया। आज हम्पी में उस स्वर्णिम युग की भव्यता की याद दिलाने वाले विशाल मंदिरों, महलों और इमारतों के खंडहर दिखाई देते हैं, जो इसके महान इतिहास की कहानी कहते हैं।

क्या यहीं थी रामायण काल की किष्किंधा?
क्या यहीं थी रामायण काल की किष्किंधा?
हम्पी अपने प्राचीन मंदिरों के कारण एक ऐसा स्थान है, जहां आस्था और इतिहास का सुंदर संगम देखने को मिलता है, जो लोगों को आकर्षित करता है। इस क्षेत्र पर लगभग 5वीं से 13वीं शताब्दी के बीच कई शक्तिशाली शासकों का प्रभुत्व रहा। दक्षिण भारत के राजाओं ने यहां विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की और इसे समृद्धि व वैभव की चरम सीमा तक पहुंचाया। रामायण में वर्णित पम्पा-क्षेत्र का भी हम्पी से गहरा संबंध माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यही स्थान वानर राज्य किष्किंधा था, जहां वनवास के दौरान भगवान राम की भेंट हनुमान जी से हुई थी। उत्तरी हम्पी में स्थित भगवान हनुमान को समर्पित एक प्राचीन मंदिर इस विश्वास को और मजबूत करता है। लोक कथाओं के अनुसार, भगवान हनुमान ने कभी इस भूमि पर निवास किया था।
भगवान शिव और पार्वती से जुड़ाव
हेमकुंटा पहाड़ी क्षेत्र में 7वीं से 14वीं शताब्दी के बीच अनेक भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ, जिनमें से अधिकांश भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हैं। प्राचीन काल में हम्पी को ‘पंपा-क्षेत्र’ के नाम से जाना जाता था, जिसका नाम हिंदू देवी पंपा पर रखा गया था। देवी पंपा को ही देवी पार्वती का एक अन्य स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने हेमकुंटा की पहाड़ियों में योगिनी रूप धारण कर कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि यह तपस्या उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के उद्देश्य से की थी। समय के साथ इस स्थान को कन्नड़ भाषा में ‘पम्पे’ कहा जाने लगा, जो आगे चलकर ‘हम्पी’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वहीं, प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित पंपा नदी वास्तव में आज की तुंगभद्रा नदी ही मानी जाती है।

संगीतमय स्तंभों का रहस्य
मैजिकल म्यूजिकल पिलर्स का रहस्य
उत्तरी हम्पी में स्थित विजय विट्ठल मंदिर अपनी शानदार वास्तुकला के लिए खास रूप से फेमस है। यहां के रहस्यमयी संगीतमय स्तंभ (मैजिकल म्यूजिकल पिलर्स) हर किसी को हैरान कर देते हैं। मंदिर परिसर के रंगमंडप में ऐसे स्तंभ हैं, जिन्हें छूने से मधुर ध्वनियां निकलती हैं। इन्हें खासतौर से “सारेगामा स्तंभ” भी कहा जाता है। इन स्तंभों के निर्माण में विशेष प्रकार के स्थानीय ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग किया गया है, जिनमें ध्वनि उत्पन्न करने की प्राकृतिक क्षमता होती है। दरअसल, इन पत्थरों में रेजोनेंस की खूबी पाई जाती है, जिसके कारण हल्के स्पर्श से निकलने वाली ध्वनि कई गुना स्पष्ट होकर गूंजती है। स्तंभों के व्यास और ऊंचाई का संतुलित अनुपात उन्हें किसी वाद्य यंत्र की तार की तरह कंपन करने में सक्षम बनाता है। विजय विट्ठल मंदिर में कुल 56 प्रमुख स्तंभ हैं, जिनमें से कई पर सुंदर मूर्तिकला भी उकेरी गई है। माना जाता है कि इन संगीतमय स्तंभों का निर्माण विजयनगर सम्राट देवराया द्वितीय के शासनकाल में हुआ था। प्राचीन काल में भगवान विट्ठल को अर्पण करते समय इन्हीं स्तंभों से निकलने वाली ध्वनियों के साथ नृत्य और पूजा संपन्न की जाती थी, जो इस मंदिर की सांस्कृतिक महत्ता को और बढ़ा देती है।

कैसे उजाड़ हुई नगरी?
फिर कैसे उजड़ हो गया हम्पी का वैभव?
जिस विजयनगर साम्राज्य को कभी अजेय माना जाता था, वही आंतरिक कमजोरी और बाहरी आक्रमणों के कारण पतन की ओर बढ़ गया। शासकों के उत्तराधिकारियों की अक्षमता और आपसी मतभेदों ने साम्राज्य को कमजोर कर दिया। इसी का लाभ उठाकर आक्रमणकारियों ने हम्पी पर हमला किया और अपार धन-संपदा लूट ली। साल 1565 में दक्कन के सुल्तानों ने कुछ स्थानीय सरदारों के सहयोग से हम्पी पर चढ़ाई की। लगभग छह महीने तक शहर में भारी लूटपाट और तोड़फोड़ होती रही। भव्य महलों को ध्वस्त कर दिया गया और मंदिरों को भी नहीं बख्शा गया। कई मंदिरों से मूर्तियां निकाल ली गईं, जिसके कारण आज अनेक धार्मिक स्थल भीतर से पूरी तरह खाली दिखाई देते हैं।
वर्ल्ड हेरिटेज साइट क्यों बना हम्पी?
आज भी हम्पी की विशाल घाटी में फैले खंडहर इसकी पूर्व भव्यता की कहानी कहते हैं। सैकड़ों एकड़ क्षेत्र में फैले इस स्थल पर लगभग 1,600 से अधिक मंदिरों, महलों और अन्य प्राचीन संरचनाओं के अवशेष मौजूद हैं। 7वीं शताब्दी में स्थापित विरुपाक्ष मंदिर यहां का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। हम्पी की सबसे प्रसिद्ध पहचान पत्थर से बना रथनुमा मंदिर है, जो भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को समर्पित है। कहा जाता है कि इस मंदिर के ग्रेनाइट से बने पहिये कभी घूमते थे। विजयनगर साम्राज्य की नींव राजा हरिहर ने रखी थी और यह साम्राज्य लगभग 1350 ईस्वी से 1565 ईस्वी तक कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के बड़े हिस्से पर शासन करता रहा। वंश के अंतिम शासक रंगराय तृतीय की मौत के बाद यहां फिर से आक्रमण हुए, जिनमें मंदिरों और महलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया। इसके बावजूद, हम्पी के अवशेष आज भी उसकी महानता और कलात्मक विरासत को दर्शाते हैं। इसी अद्वितीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण यूनेस्को (UNESCO) ने 1986 में हम्पी को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्रदान किया है।