मणिपुर में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जोमी और कुकी समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में अवैध हथियार और गोला-बारूद सुरक्षा बलों को स्वेच्छा से सौंप दिए। यह आत्मसमर्पण मणिपुर के माननीय राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की 20 फरवरी 2025 को की गई अपील के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने सभी समुदायों से सात दिनों के भीतर लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सौंपने की अपील की थी। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि समय सीमा के भीतर हथियार नहीं सौंपे गए, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा बलों और प्रशासन की सक्रिय भूमिका
राज्यपाल की इस अपील के बाद, असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ, राज्य खुफिया एजेंसियां और राज्य प्रशासन ने जोमी और कुकी समुदाय के नेताओं से गहन बातचीत की। इस दौरान समुदाय के लोगों की सुरक्षा चिंताओं को सुना गया और उन्हें यह आश्वासन दिया गया कि हथियारों का आत्मसमर्पण न केवल क्षेत्र में स्थिरता लाएगा, बल्कि समुदाय की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र को हथियार-मुक्त करने के सकारात्मक प्रभावों को भी रेखांकित किया, जिससे शांति प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।
शांति की दिशा में बड़ा कदम
इन वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम सामने आए और जोमी तथा कुकी समुदाय के नेताओं ने बड़ी मात्रा में हथियारों को स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। यह आत्मसमर्पण केंद्र सरकार की शांति स्थापना नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों और राज्य प्रशासन के साथ हुई चर्चा के बाद, जोमी और कुकी समुदाय के नेताओं ने स्थानीय निवासियों को भी इस पहल में शामिल किया और 22 फरवरी 2025 को चुराचांदपुर जिले के तुइबोंग गांव में पहली खेप में हथियार सौंपे।
समर्पित किए गए हथियार और गोला-बारूद
इस आत्मसमर्पण के तहत कुल 16 घातक हथियार और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद सुरक्षा बलों को सौंपे गए। इनमें शामिल हैं:
राइफलें और मशीनगन:
एक एम-16 राइफल, एक 7.62 मिमी एसएलआर, दो AK-47 राइफल, तीन इंसास राइफल, एक 9 मिमी कार्बाइन मशीनगन, तीन .303 राइफल और दो सिंगल बैरल राइफल शामिल है।
भारी हथियारो में दो M-79 (40 मिमी अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर), एक 51 मिमी मोर्टार के साथ 64 जिलेटिन स्टिक, 10 राउंड 60 मिमी पंपी (इम्प्रोवाइज्ड मोर्टार), 17 राउंड एके-47 गोला-बारूद, 40 राउंड 5.56 मिमी राइफल गोला-बारूद और 3 राउंड 9 मिमी कैलिबर गोला-बारूद समर्पित किए गए। हथियारों का यह आत्मसमर्पण असम राइफल्स, सीआरपीएफ, राज्य नागरिक प्रशासन, पुलिस और राज्य खुफिया एजेंसियों की मौजूदगी में किया गया।
क्षेत्र में शांति स्थापना की उम्मीद
संयुक्त सुरक्षा बलों और राज्य प्रशासन की इस रणनीतिक पहल को मणिपुर में शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य अन्य सशस्त्र समूहों को भी प्रेरित करना है ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
सरकार को उम्मीद है कि यह पहल मणिपुर के युवाओं को भी प्रभावित करेगी, जिससे वे हिंसा छोड़कर विकास और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ सकें। इस तरह के आत्मसमर्पण भविष्य में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और स्थायी शांति स्थापित करने में सहायक साबित हो सकते हैं।
सरकारी बयान
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह आत्मसमर्पण मणिपुर में शांति स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि सरकार और सुरक्षा बलों की इस पहल से अन्य समूहों को भी हथियार छोड़ने और क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
