नेशनल हेराल्ड मामले में शनिवार को हुई अहम सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस. वी. राजू ने अदालत में कई गंभीर आरोप पेश किए। उन्होंने कहा कि यंग इंडियन लिमिटेड, जो कि गांधी परिवार से जुड़ी एक निजी कंपनी है, धन शोधन (money laundering) में संलिप्त थी और इसे चंदा देने से लोगों को कांग्रेस पार्टी से चुनावी टिकट दिलवाने में मदद मिलती थी। ईडी के आरोपपत्र में सोनिया और राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, सुमन दुबे, सुनील भंडारी और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड के नाम शामिल हैं।
क्या कहा एएसजी राजू ने?
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में अपनी प्रत्युत्तर दलीलें पेश करते हुए एएसजी राजू ने अभियोजन पक्ष की शिकायत में दर्ज कुछ गवाहों के बयानों का हवाला दिया। उन्होंने कहा: "यंग इंडियन को धन देने से टिकट मिल सकता है — यह बात एक गवाह ने स्पष्ट रूप से बताई।" उन्होंने एक अन्य गवाह का बयान पढ़ा, जिसमें बताया गया कि उसे यंग इंडियन के बैंक खाते में 50 लाख रुपये जमा करने को कहा गया था, और बदले में उतनी ही राशि नकद में वापस मिलने की बात थी। उसने कथित तौर पर 20 लाख रुपये जमा किए और उतना ही कैश वापस लिया।
राजनीतिक फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग?
एएसजी राजू ने कहा कि यंग इंडियन को जिन लोगों ने चंदा दिया, वे कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर ऐसा कर रहे थे और कई दानदाताओं को यह तक नहीं पता था कि यंग इंडियन असल में क्या करती है। “कुछ लोगों ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के कहने पर दान दिया। उन्हें यंग इंडियन के उद्देश्यों का कोई ज्ञान नहीं था। यह पूरी प्रक्रिया साफ तौर पर संदेहास्पद है।”
ईडी के आरोप और गांधी परिवार की भूमिका
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के अनुसार: यंग इंडियन, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास 76% शेयर हैं, ने धोखाधड़ी से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति अधिग्रहित की। एजेएल वही संस्था है जो नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करती थी। ईडी का आरोप है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने गुप्त रूप से एजेएल को 90 करोड़ रुपये का ऋण दिया, जिसे बाद में यंग इंडियन ने सिर्फ 50 लाख रुपये में अधिग्रहित कर लिया। यह पूरा लेन-देन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है।
