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विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025: “स्वस्थ शुरुआत, आशापूर्ण भविष्य” की थीम पर गुजरात बना मातृ व बाल स्वास्थ्य का राष्ट्रीय अग्रदूत

Gujarat News: फरवरी 2025 में दिल्ली में आयोजित SKOCH 100 समिट में बाल स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए गुजरात को दो स्वर्ण SKOCH पुरस्कार मिले। गुजरात ने MMR में 50% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की, जबकि IMR में भी 57.40% की महत्वपूर्ण गिरावट आई। गुजरात देश का एकमात्र राज्य है, जो स्कूली छात्रों को डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी करता है और अब तक 1.15 करोड़ कार्ड जारी हुए।

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गुजरात देश का एकमात्र राज्य, जो स्कूली छात्रों को डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी करता है; अब तक 1.15 करोड़ कार्ड जारी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत" के मंत्र को दृष्टिगत रखते हुए, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य की हर मां और हर बच्चे को जीवन की शुरुआत से ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों, जो विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 की थीम "स्वस्थ शुरुआत, आशावान भविष्य" के अनुरूप है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 की यह थीम मातृ और नवजात स्वास्थ्य पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाना और मातृ व शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाना है। इसी दिशा में, गुजरात सरकार ने कई नवाचारी और प्रभावशाली पहलें की हैं, जिससे वह मातृ एवं बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की अग्रणी राज्यों में से एक बन गई है।

मातृ मृत्यु दर में 50% की उल्लेखनीय कमी के साथ मातृत्व को किया सुरक्षित

गुजरात सरकार ने मातृ स्वास्थ्य सुधार के लिए अपने केंद्रित प्रयासों से मातृ मृत्यु दर में 50% की उल्लेखनीय कमी हासिल की है। गुजरात की मातृ मृत्यु दर (MMR) जो वर्ष 2011-13 में 112 थी, यह 2020 में जारी आंकड़ों के अनुसार घटकर 57 हो गई है। आपको बता दें कि, गुजरात में हर वर्ष 14 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण जांच, टीकाकरण और पोषण सेवाएं प्रदान की जाती हैं। गुजरात ने मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए 121 फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRUs), 153 ब्लड स्टोरेज यूनिट्स और 20 मातृ आईसीयू की स्थापना की है, जिससे आपातकालीन स्थिति में समय पर और सुरक्षित इलाज सुनिश्चित हो सके। इसके परिणामस्वरूप, राज्य ने 99.97% संस्थागत प्रसव दर हासिल की है, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल है।

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गुजरात ने MMR में दर्ज की 50% की उल्लेखनीय कमी, जबकि IMR में भी आई 57.40% की महत्वपूर्ण गिरावट।

HBNC, HBYC और SNCU कार्यक्रमों का सकारात्मक असर

राज्य सरकार सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप 2030 तक शिशु मृत्यु दर को एकल अंक में लाने के लक्ष्य की दिशा में कार्य कर रही है। इन प्रयासों के परिणाम स्वरूप गुजरात में शिशु मृत्यु दर (IMR) में 2005 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 54 से घटकर 2020 में 23 हो गई है, जो कि 57.40% की उल्लेखनीय गिरावट को दर्शाता है। इस उपलब्धि के पीछे होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) और होम-बेस्ड यंग चाइल्ड केयर (HBYC) जैसी प्रमुख पहलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा, SAANS और स्टॉप डायरिया जैसे अभियानों के साथ-साथ गुजरात की मजबूत नवजात शिशु देखभाल प्रणाली जिसमें 58 विशेष नवजात देखभाल इकाइयाँ (SNCUs), 138 नवजात स्थिरीकरण इकाइयाँ (NBSUs), और 1,083 नवजात देखभाल कोने (NBCCs) शामिल हैं, ने भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अहम योगदान दिया है।

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2019 से 2023 के बीच नवजात स्वास्थ्य जांच, जन्मजात विकारों की पहचान और प्रबंधन के क्षेत्र में गुजरात बड़े राज्यों में राष्ट्रीय स्तर पर रहा पहले स्थान पर।

SH-RBSK और “Breaking the Silence” अभियान

गुजरात की प्रमुख योजना SH-RBSK (स्कूल स्वास्थ्य – राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत राज्य में हर वर्ष 1.61 करोड़ से अधिक बच्चों की जांच 992 मोबाइल हेल्थ टीमों और 28 जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्रों के माध्यम से की जाती है। जनवरी 2025 तक इस पहल के अंतर्गत 206 किडनी, 37 लीवर और 211 बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कराए गए हैं। इसके अलावा, 20,981 बच्चों को किडनी संबंधी, 11,215 को कैंसर, और 1,67,379 बच्चों को हृदय संबंधी बीमारियों के लिए नि:शुल्क इलाज प्रदान किया गया है। इन अभियान से बाल स्वास्थ्य में बदलाव और आशा की बहाली हो रही है।

पीड़ित बच्चों को नि:शुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की सुविधा

इसी तरह SH-RBSK के तहत गुजरात सरकार की "ब्रेकिंग द साइलेंस" मुहिम गंभीर श्रवण हानि से पीड़ित बच्चों को नि:शुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की सुविधा प्रदान करती है। अब तक इस अभियान के माध्यम से 3,260 बच्चों की सुनने की क्षमता वापस लाई जा चुकी है, जिसे राज्य सरकार द्वारा ₹228 करोड़ के समर्थन से संभव बनाया गया। इन प्रभावशाली उपलब्धियों की मान्यता स्वरूप, फरवरी 2025 में गुजरात के स्वास्थ्य विभाग को बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए दो प्रतिष्ठित गोल्ड SKOCH अवार्ड प्रदान किए गए।

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गुजरात ने 99.97% संस्थागत प्रसव दर हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर कायम की मिसाल।

बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करता गुजरात

गौरतलब है कि गुजरात देश का पहला राज्य है जो स्कूली छात्रों को डिजिटल हेल्थ कार्ड रिपोर्ट जारी करता है। अब तक 1.15 करोड़ से अधिक डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं। ये डिजिटल हेल्थ कार्ड प्रत्येक छात्र की स्वास्थ्य जांच और उपचार संबंधी पूरी जानकारी को सुरक्षित रूप से संचित करते हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य की निरंतर और समग्र निगरानी सुनिश्चित होती है। बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और सुदृढ़ करते हुए, गुजरात ने 2019 से 2023 के बीच नवजात शिशु स्वास्थ्य जांच, जन्मजात विकारों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन में बड़े राज्यों की श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान भी प्राप्त किया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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