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शरद पवार ने अपनी ही 'जेड प्लस' सुरक्षा पर क्यों उठाया सवाल? कर दिया ये बड़ा दावा

Z Plus Security: शरद पवार ने खुद को मिले सुरक्षा घेरे पर ही सवाल खड़ा किया है। उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए ये कहा है कि 'जेड प्लस' सुरक्षा 'प्रामाणिक जानकारी' हासिल करने का जरिया हो सकती है। केंद्र सरकार ने बीते बुधवार को ही पवार को Z Plus सिक्योरिटी दी है।

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खुद को मिली जेड प्लस सुरक्षा पर क्या बोले शरद पवार।

Sharad Pawar on His Security: महाराष्ट्र में अब सिक्योरिटी पर सियासत गरमाई हुई है, वजह क्या है ये समझना फिलहाल थोड़ा मुश्किल है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने खुद के ही सुरक्षा घेरे को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए ये कहा कि उन्हें दी गई ‘जेड प्लस’ सुरक्षा उनके बारे में ‘प्रामाणिक जानकारी’ हासिल करने का जरिया हो सकती है।

सुरक्षा बढ़ाने को लेकर पवार को नहीं कोई जानकारी

केंद्र की मोदी सरकार ने शरद पवार को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा प्रदान की। यह अतिविशिष्ट व्यक्ति (वीआईपी) को दी जाने वाली सर्वोच्च श्रेणी की सुरक्षा है। दिग्गज राजनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार ने उनकी सुरक्षा बढ़ाने के बारे में पूछने पर नवी मुंबई में पत्रकारों से कहा कि उन्हें इस कदम के पीछे के मकसद की जानकारी नहीं है।

‘जेड प्लस’ सुरक्षा मिलने पर शरद पवार ने ली चुटकी

शरद पवार ने कहा, 'गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने मुझे बताया कि सरकार ने तीन लोगों को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा देने का फैसला किया है और मैं उनमें से एक हूं... अन्य दो लोग राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं।' उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, 'चुनाव नजदीक आ रहे हैं, इसलिए यह मेरे बारे में प्रामाणिक जानकारी हासिल करने का जरिया हो सकता है।'

वीआईपी सुरक्षा का सारा वर्गीकरण समझिए

फिलहाल ये कहना मुश्किल है कि सुरक्षा घेरे को लेकर शुरू हुई ये सियासत कितने दिनों तक चलेगी। इसी साल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सभी सियासी पार्टियां और दिग्गज नेताओं ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। शरद पवार की ‘जेड प्लस’ सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 55 सशस्त्र कर्मियों के एक इज को नियुक्त किया गया है। वीआईपी सुरक्षा का वर्गीकरण ‘जेड प्लस’ (सर्वोच्च) से शुरू होता है, उसके बाद ‘जेड’, ‘वाई प्लस’, ‘वाई’ और ‘एक्स’ आते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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