देश

62 का दूल्हा , 46 की दुल्हन.... 'खाकी के विलेन' Bihar के कुख्यात अशोक महतो ने क्यों रचाई शादी?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 20, 2024, 01:08 PM IST

Ashok Mahato Marriage News: बिहार में 90 के दशक में बाहुबली अशोक महतो की तूती बोलती थी। उस पर कई नरसंहार में शामिल होने के आरोप लगे हैं। साथ ही महतो 17 साल जेल में रहकर बीते 10 दिसंबर, 2023 को बाहर आया था। तब से ही वह चुनावी तैयारी में जुटा हुआ है।

Image

बिहार के बाहुबली अशोक महतो ने की शादी

Photo : Times Now Digital

Ashok Mahato Marriage News: एक वेब सिरीज आई थी, खाकी... द बिहार चैप्टर। यह सिरीज IPS अमित लोढा और बिहार के बाहुबली अशोक महतो के बीच टकराव पर आधारित थी। अब इस वेब सिरीज के रियल लाइफ विलेन अशोक महतो ने 62 साल की उम्र 46 साल की अनीता से शादी रचा ली है। यह शादी इसलिए भी चर्चा में बनी हुई है क्योंकि खरमास के महीने में शादियां नहीं होती हैं। हालांकि, इस शादी का कनेक्शन लोकसभा चुनाव से है।

चर्चा है कि मुंगेर लोक सभा सीट से राजद अशोक महतो पर टिकट देना चाह रही थी। हालांकि, उस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिस कारण वह चुनाव नहीं लड़ सकता है। ऐसे में उसने पहले शादी रचाई, अब राजद महतो की पत्नी को मुंगेर से प्रत्याशी बना सकती है। मुंगेर वही सीट है, जहां से जनता दल यूनाईटेट के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सांसद हैं। इस बार भी उनका उतरना फाइनल है।

अशोक महतो पत्नी अनीता के साथ

अशोक महतो पत्नी अनीता के साथ

आनन-फानन में हुई शादी

बताया जाता है कि अशोक महतो को शादी के लिए पहले तो लड़की ही नहीं मिल रही थी। काफी खोजबनी हुई तो महतो को लखीसराय की लड़की अनीता मिली, जिसके बाद बख्तियारपुर करौटा में दोनों ने बिना मुहूर्त देखे शादी कर ली। कयास लगाए जा रहे हैं कि अशोक महतो अब अपनी पत्नी को मुंगेर लोकसभा से चुनाव लड़ाएंगे।

लालू की सलाह पर की शादी!

चर्चा है कि कुछ दिन पहले राजद सुप्रीमो लालू यादव ने अशोक महतो को बुलाकर कहा था कि चुनाव लड़ो, साथ ही लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि चुनाव में किसी भी तरह का कोई मुद्दा न बने इसके लिए आप शादी कर लो। महतो अभी तक शादीशुदा नहीं थे। उन्हें डर था कि अगर वह चुनाव लड़ेंगे तो कोई न कोई कहानी बनाकर नॉमिनेशन रद्द न हो जाएगा। इसलिए सेफ साइड खेलने के लिए उन्होंने दो दिनों में शादी कर ली। ताकि अगर उनको टिकट न मिले तो वे अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाएं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article