एयरक्राफ्ट कैरियर यानी कि विमानवाहक पोत, जो कई खतरनाक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, अपने डिफेंस के लिए मिसाइल और आधुनिक रडार से लैस रहता है, तब भी किसी मिशन पर अकेले नहीं जाता, इसका सबसे बड़ा कारण है, खुद एयरक्राफ्ट कैरियर की सुरक्षा। एयरक्राफ्ट कैरियर की सुरक्षा के लिए उसके साथ कई युद्धपोत से लेकर सबमरीन तक तैनात रहते हैं।
एयरक्राफ्ट कैरियर केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता एयरबेस होता है। हालांकि यह बेहद शक्तिशाली दिखता है, लेकिन स्वयं कैरियर की संरचना उसे कई प्रकार के खतरों के प्रति संवेदनशील भी बनाती है। समुद्र में पनडुब्बियों, एंटी-शिप मिसाइलों, माइंस और दुश्मन के युद्धपोतों से खतरा हमेशा बना रहता है। अगर कैरियर अकेले चले तो इन खतरों का मुकाबला करना उसके लिए मुश्किल हो सकता है।
एयरक्राफ्ट कैरियर हमेशा एक “कैरियर स्ट्राइक ग्रुप” या “बैटल ग्रुप” के साथ चलता है। इस समूह में विध्वंसक (डिस्ट्रॉयर), फ्रिगेट, पनडुब्बी और सप्लाई जहाज़ शामिल होते हैं। डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट आधुनिक रडार और मिसाइल सिस्टम से लैस होते हैं, जो दुश्मन की मिसाइलों और विमानों को दूर से ही रोक सकते हैं। पनडुब्बियां समुद्र के नीचे से आने वाले खतरों पर नजर रखती हैं और जरूरत पड़ने पर जवाबी हमला कर सकती हैं।
एयरक्राफ्ट कैरियर महीनों तक समुद्र में रह सकता है, लेकिन उसे नियमित रूप से ईंधन, भोजन, पुर्जों और गोला-बारूद की जरूरत पड़ती है। एयरक्राफ्ट कैरियर पर सैकड़ों की संख्या में नौसैनिक काम करते हैं, जिसमें युद्धपोत के संचालन से लेकर विमान के पायलट तक शामिल होते हैं।
एयरक्राफ्ट कैरियर बेहद महंगा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण युद्धपोत होता है। इसके निर्माण में कई साल लग जाते हैं। ऐसे में कोई भी देश ये नहीं चाहता कि उसके एयरक्राफ्ट कैरियर को कोई नुकसान पहुंचे। इसलिए उसे हमेशा बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच के साथ तैनात किया जाता है, ताकि उसकी क्षमता का अधिकतम उपयोग हो और खतरे न्यूनतम रहें। यही कारण है कि एयरक्राफ्ट कैरियर लगभग कभी भी अकेले मिशन पर नहीं जाते।
सबसे पहले तो यह आसानी से कोई भी देश यह लीक नहीं होने देता है कि स्ट्राइक ग्रुप में कितने युद्धपोत और कितनी पनडुब्बियां हैं। INS विक्रांत पर MiG 29 तैनात होता है, ध्रुव और सीहॉक जैसे हेलीकॉप्टर रहते हैं। इसके अलावा पानी में सहायता के लिए कम से कम दो युद्धपोत INS Kolkata या INS Visakhapatnam जैसे जहाज मौजूद रहते हैं। INS Shivalik या INS Talwar जैसे फ्रिगेट रहते हैं, INS Chakra जैसी सबमरीन होती है, INS Deepak जैसे टैंकर साथ होता है।
अमेरिकी नौसेना का USS Gerald R. Ford दुनिया के सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत एयरक्राफ्ट कैरियरों में गिना जाता है। फोर्ड के डेक पर तैनात एयर विंग इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इसमें आम तौर पर F/A-18E/F Super Hornet जैसे बहु-भूमिका लड़ाकू विमान, F-35C Lightning II स्टील्थ फाइटर, E-2D Advanced Hawkeye निगरानी विमान और MH-60R Seahawk हेलीकॉप्टर शामिल होते हैं। कैरियर के आसपास आमतौर पर गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात रहते हैं, जैसे USS Arleigh Burke श्रेणी के जहाज। इनके अलावा एक गाइडेड मिसाइल क्रूजर भी शामिल हो रहता है, जैसे USS Ticonderoga। समूह में एक परमाणु चालित हमला पनडुब्बी भी रहती है, जैसे USS Virginia। साथ ही रसद और ईंधन के लिए अलग-अलग जहाज होते हैं। ये मिशन पर निर्भर करता है।