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Form-6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म क्यों? चुनाव आयोग ने दी सफाई, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

आयोग के मुताबिक 24 जून 2025 के बिहार एसआईआर आदेश में फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा फॉर्म यानी एनेक्सचर-डी लगाने का प्रावधान किया गया था।

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Form-6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म क्यों? (फाइल फोटो)

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त डिक्लेरेशन फॉर्म लेने को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के मुताबिक यह व्यवस्था अचानक या सिर्फ किसी एक राज्य के लिए नहीं लाई गई, बल्कि अलग-अलग चरणों में हुए एसआईआर में इसे लागू किया गया है।

बिहार से शुरू हुआ फॉर्म-6 के साथ डिक्लेरेशन का प्रावधान

आयोग के मुताबिक 24 जून 2025 के बिहार एसआईआर आदेश में फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा फॉर्म यानी एनेक्सचर-डी लगाने का प्रावधान किया गया था। यह फैसला आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद लिया गया था।इस व्यवस्था के तहत जो व्यक्ति नए मतदाता के तौर पर अपना नाम जुड़वाने या बिहार से बाहर से आकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 या फॉर्म-8 भरता है, उसे अतिरिक्त घोषणा फॉर्म भी देना होता है।

सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहा नियम

चुनाव आयोग के दस्तावेज के मुताबिक, इसके बाद 27 अक्टूबर 2025 को 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किए गए एसआईआर में भी यही प्रावधान रखा गया। इसके बाद 14 मई 2026 को 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी एसआईआर आदेश में भी फॉर्म-6/फॉर्म-8 के साथ अतिरिक्त घोषणा फॉर्म की व्यवस्था बरकरार रखी गई। आयोग ने इन दोनों मौकों पर भी अपनी सर्वसम्मत मंजूरी का उल्लेख किया है।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

अब चुनाव आयोग ने अपने पक्ष में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम चुनाव आयोग मामले में 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। आयोग के दस्तावेज में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उस हिस्से को उद्धृत किया गया है जिसमें एसआईआर के तहत नए मतदाता से फॉर्म-6 के साथ एनेक्सचर-डी में डिक्लेरेशन फॉर्म लिए जाने का उल्लेख है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची की शुद्धता और पात्रता की जांच के लिए उचित प्रक्रिया और दस्तावेजी व्यवस्था तैयार करने की शक्ति है, हालांकि यह शक्ति कानून और तर्कसंगत प्रक्रिया की सीमाओं के भीतर है।

आयोग का दावा- मतदाताओं की सुविधा के लिए लाया गया फॉर्म

चुनाव आयोग का कहना है कि अतिरिक्त डिक्लेरेशन फॉर्म मतदाताओं की सुविधा के लिए पेश किया गया है।आयोग के मुताबिक, जो व्यक्ति यह घोषणा फॉर्म जमा करता है, उसे कोई दूसरा दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था एसआईआर वाले सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक समान तरीके से लागू की गई है।

आखिर डिक्लेरेशन फॉर्म में क्या है?

इसका मकसद नए मतदाता की ओर से दी गई घोषणा को दर्ज करना और उसे फॉर्म-6 के साथ जोड़ना है। चुनाव आयोग का तर्क है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने की पात्रता की जांच के लिए यह व्यवस्था इस्तेमाल की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के 27 मई के फैसले में भी एसआईआर के दस्तावेजी ढांचे पर विस्तार से चर्चा हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि मतदाता सूची तैयार करना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है और पात्रता की जांच के लिए उचित दस्तावेजी व्यवस्था बनाई जा सकती है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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