देश

बसपा ने किस नेता को आगे बढ़ाने का प्लान बनाया? मायावती ने खुद दिया इसका जवाब

UP Politics: मायावती ने कहा है कि बहुजन समाज से जो भी पार्टी हित में काम करेगा, उसे आगे बढ़ाया जाएगा। बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा कि 'मैं हमेशा की तरह, आगे भी अपने जीते-जी अपने व्यक्तिगत तथा भाई-बहिन व अन्य रिश्ते-नातों आदि के स्वार्थ में कभी भी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दूंगी।'

Image

BSP सुप्रीमो मायावती।

Photo : PTI

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को कहा कि भाई-बहन और रिश्ते-नाते उनके लिए महज बहुजन समाज के लोगों के बराबर ही हैं। मायावती ने कहा कि इसके अलावा बहुजन समाज से जो भी पार्टी हित में काम करेगा, उसे पार्टी में आगे बढ़ाया जाएगा और इस पर उनके रिश्ते-नाते आड़े नहीं आएंगे।

बसपा सुप्रीमो ने राजधानी में सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही। इस दौरान उन्होंने सामाजिक परिवर्तन और जातिवादी मानसिकता से हटकर बहुजन समाज को सम्मान दिलाने की बात कही। उन्होंने कहा कि होली सहित अन्य विभिन्न त्योहारों के बीच इस बार कांशीराम जी की जयंती जिस अति उत्साह और जोश के साथ मनाकर उनके अनुयायियों ने अपनी पार्टी को हर स्तर पर मजबूत बनाने का जो संकल्प लिया है, उसने पार्टी को मजबूती देने के लिए उनकी हिम्मत और हौसले को कई गुना बढ़ा दिया है।

'जो भी पार्टी हित में काम करेगा, उसे आगे बढ़ाया जाएगा'

मायावती ने कहा, 'मैं हमेशा की तरह, आगे भी अपने जीते-जी अपने व्यक्तिगत तथा भाई-बहिन व अन्य रिश्ते-नातों आदि के स्वार्थ में कभी भी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दूंगी।'उन्होंने कहा, 'वैसे भी मेरे भाई-बहिन व अन्य रिश्ते-नाते आदि मेरे लिए केवल बहुजन समाज का ही एक अंग है, उसके सिवाय कुछ भी नहीं है। इसके अलावा पार्टी व बहुजन आंदोलन के हित में बहुजन समाज के जो भी लोग अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करते हैं, तो उन्हें पार्टी में जरूर आगे बढ़ने का मौका दिया जायेगा और इस मामले में मेरे रिश्ते-नाते आड़े नहीं आयेंगे।'

मायावती का यह बयान यहां इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में दो मार्च को उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के सभी पदों से हटाने के साथ ही बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके साथ ही यह भी घोषित किया था कि जब तक वह जीवित हैं, उनका कोई भी उत्तराधिकारी नहीं होगा।

पीएम मोदी के बारे में बसपा सुप्रीमो मायावती ने क्या कुछ कहा?

बसपा प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा, 'यहां मैं यह भी कहना चाहूंगी कि देश के प्रधानमंत्री बीच-बीच में अपनी खुद की गरीबी का तो जरूर उल्लेख करते रहते हैं, लेकिन इन्होंने दलित व अन्य उपेक्षित वर्गों के लोगों की तरह यहां कभी भी कोई जातीय भेदभाव नहीं झेला है, जो यह सब हमारे संतों, गुरुओं व महापुरुषों ने झेला है, जिसे अभी भी इनके अनुयायी काफी हद तक झेल रहे हैं।'

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'पिछले कुछ समय से वक्फ बिल पर भी सत्ता व विपक्ष द्वारा जो राजनीति की जा रही है, तो यह भी अति-चिंता की बात है और यदि यह मामला समय रहते आम-सहमति से सुलझा लिया जाता तो ज्यादा बेहतर होता। केन्द्र सरकार इस मामले में जरूर पुनः सोच-विचार करे।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article