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जब इंदिरा गांधी चांद पर गईं... राकेश रौशन वाले बयान के बाद ममता बनर्जी की फिर फिसली जुबान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 29, 2023, 05:12 PM IST

Mamata Banerjee: ममता बनर्जी ने कहा, जब इंदिरा गांधी चंद्रमा पर पहुंची तो उन्होंने राकेश शर्मा से पूछा वहां से हिंदुस्तान कैसा दिखता है, उन्होंने जवाब दिया- 'सारे जहां से अच्छा।'

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ममता बनर्जी

Photo : PTI

Mamata Banerjee: चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद अपने स्पेस ज्ञान को लेकर ममता बनर्जी पहले ही अपनी किरकिरी करा चुकी हैं। एक बार फिर उन्होंने अंतरिक्ष को लेकर अपना ज्ञान दिया है, जिसके बाद वह लोगों के निशाने पर आ गई हैं। दरअसल, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा तृणमूल छात्र परिषद की स्थापना दिवस पर ममता बनर्जी एक रैली को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उनकी जुबान फिसल गई।

रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, जब इंदिरा गांधी चंद्रमा पर पहुंची तो उन्होंने राकेश शर्मा से पूछा वहां से हिंदुस्तान कैसा दिखता है, उन्होंने जवाब दिया- 'सारे जहां से अच्छा।' इससे पहले इसरो को चंद्रयान-3 मिशन की बधाई देते हुए भी ममता बनर्जी की जुबान फिसल गई थी उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी ने 'राकेश रोशन' से पूछा था कि चंद्रमा से धरती कैसी दिखती है।

अन्य नेताओं ने भी दिया चंद्रयान पर अल्प ज्ञान

ममता बनर्जी ही नहीं, चंद्रयान-3 की सफलता के बाद कई नेताओं के बयान सामने आए और उनके अंतरिक्ष ज्ञान की कलई खुलकर सामने आ गई। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने यहां तक कह दिया था कि चंद्रयान-3 के धरती पर सकुशल लौट आने का जो टाइम पर है, आने के बाद उसका स्वागत पूरे देश को करना चाहिए। वहीं राजस्थान के मंत्री अशोक चांदना ने कहा था कि चंद्रयान में जो यात्री गए हुए हैं, उनको सलाम करता हूं।

बगले झांकने लगे थे नीतीश कुमार

इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तो चंद्रयान-3 के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया तो पहले उन्होंने अपने पास खड़े मंत्री से उसके बारे में जानकारी ली, इसके बाद यह कहकर आगे बढ़ गई कि अच्छी बात है ना... होने दीजिए लैंडिंग।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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