कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि अगर वह राजनीति में नहीं होते, तो शायद एयरोस्पेस क्षेत्र में किसी उद्यमिता से जुड़े होते। राहुल गांधी ने तिरुवनंतपुरम टेक्नोपार्क में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के पेशवरों के साथ संवाद के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए यह कहा। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें एक नेता के रूप में परिभाषित किया है, लेकिन वास्तव में वह और भी बहुत कुछ करते हैं।
नेता न होते तो क्या होते राहुल गांधी?
लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा कि उनका मानना है कि किसी को नेता, तकनीकी विशेषज्ञ या इंजीनियर कहना ’’परिभाषाओं को सीमित करना’’ है। उन्होंने कहा, "यदि मैं किसी राजनीतिक संगठन के लिए काम नहीं कर रहा होता, तो शायद मैं कोई उद्यम कर रहा होता, शायद एयरोस्पेस के क्षेत्र में। मैं एक पायलट हूं, मेरे पिता और मेरे चाचा भी पायलट थे। इसलिए हमारे परिवार में इसकी थोड़ी परंपरा रही है। हमें हर चीज के बारे में जिज्ञासु होना चाहिए। आपको हर बात के प्रति खुला दिमाग रखना चाहिए और तभी आप चीजों को आपस में जोड़ना शुरू कर सकते हैं।"
चीन की राहुल गांधी ने की आलोचना
राहुल गांधी ने कहा कि चीन ने दुनिया में एक उत्कृष्ट और बेजोड़ औद्योगिक प्रणाली का निर्माण किया है, लेकिन पड़ोसी देश की व्यवस्था दबावपूर्ण और अलोकतांत्रिक है। राहुल गांधी ने कहा कि चीन ने औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है, जबकि अमेरिका, भारत और दुनिया के अधिकतर देश उपभोग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार वास्तविक रोजगार औद्योगिक उत्पादन क्षेत्र में होते हैं, न कि उपभोग आधारित क्षेत्रों में। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "निराशाजनक बात यह है कि हमने चीन को इसे (औद्योगिक उत्पादन) पूरी तरह अपने कब्जे में लेने दिया।"
भारत इलेक्ट्रिक गतिशीलता के क्षेत्र में चीन से प्रतिस्पर्धा कर सकता है- राहुल
उन्होंने कहा कि यदि भारत देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए एक मजबूत औद्योगिक उत्पादन प्रणाली विकसित कर सके, तो यह भारत और दुनिया के लोगों के लिए बहुत बड़ी सेवा होगी। उन्होंने एक और चिंता जताते हुए कहा कि सैन्य शक्ति का बड़ा हिस्सा अब इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरियों की ओर बढ़ रहा है, जैसा कि रूस-यूक्रेन युद्ध या पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक पर भारत, अमेरिका या यूरोप नहीं, बल्कि चीन का प्रभुत्व है। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ी समस्या है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि ’इंटरनल कंबशन इंजन’ से बैटरी द्वारा संचालित इलेक्ट्रिक मोटर की ओर बढ़ने की क्षमता रखने वाला भारत ही एकमात्र देश है। उन्होंने कहा- "इस बदलाव के लिए हमारे पास ही वह पैमाना है। जहां तक इलेक्ट्रिक मोटर आधारित चक्रीय गतिशीलता की बात आती है, अमेरिका और यूरोप अब चीन से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि सही नीतियों और सही दृष्टि के साथ भारत इलेक्ट्रिक गतिशीलता के क्षेत्र में चीन से प्रतिस्पर्धा कर सकता है। अगर हम ऐसा कर पाते हैं, तो इससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होंगे।"
