चार दिसंबर को भारत आएंगे व्लादिमीर पुतिन। तस्वीर-AP
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार दिसंबर को दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंच रहे हैं। रूसी तेल को लेकर अमेरिका से रिश्तों में खटास के बीच उनके इस दौरे पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं। इस दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच डिफेंस समझौते को लेकर बड़े एलान हो सकते हैं। डिनर डिप्लोमेसी से लेकर डिफेंस डील तक रूसी राष्ट्रपति के भारत में बिताए जाने वाले 30 घंटे बेहद अहम हैं। इस बीच, व्लादिमीर पुतिन के दौरे का पूरा कार्यक्रम भी सामने आ गया है।
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25वें वर्ष पूरे होने के मौके पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए भारत दौरे पर आ रहे हैं। वे 4 दिसंबर 2025 की शाम को नई दिल्ली पहुंच जाएंगे। चार साल बाद हो रहे पुतिन के दौरे के लिए प्रधानमंत्री मोदी भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। उन्होंने खुद पुतिन के लिए रात्रिभोज का इंतजाम किया है।
पुतिन के आगमन के कुछ घंटे बाद ही करीब सात बजे पीएम मोदी 7 लोक कल्याण मार्ग (7 एलकेएम) स्थित अपने आधिकारिक आवास में उनके सम्मान में निजी डिनर का आयोजन करेंगे। यह डिनर द्विपक्षीय रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से रखा गया है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में खटास बढ़ी है।
इसके बाद अगले दिन यानी पांच दिसंबर को सुबह करीब नौ बजे राष्ट्रपति पुतिन का राजकीय दौरा राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत से शुरू होगा। इस दौरान तीनों सेनाओं के जवान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देंगे।
यहां से राष्ट्रपति पुतिन सुबह करीब 10 बजे राजघाट जाएंगे। जहां वे महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद, करीब 11 बजे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन हैदराबाद हाउस में 23वें भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। यहां पीएम मोदी पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए दोपहर के भोजन की मेजबानी करेंगे। द्विपक्षीय वार्ता के बाद कई बड़ी घोषणाएं और महत्वपूर्ण समझौते होने की उम्मीद है। दोनों नेता अपनी वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करेंगे तथा बयान जारी करेंगे।
इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी शुक्रवार को करीब चार बजे भारत मंडपम में भारत-रूस बिजनेस फोरम को भी संबोधित करेंगे। शिखर सम्मेलन के बाद, पुतिन रूसी सरकारी प्रसारक RT के नए भारत चैनल का शुभारंभ करेंगे।
इसके बाद शाम करीब सात बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने रूसी समकक्ष के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी। इसमें शामिल होने के बाद पुतिन रात लगभग 9:30 बजे देश से रवाना होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की शुक्रवार को होने वाली शिखर वार्ता का केंद्र बिंदु रक्षा सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार को बाहरी दबाव से बचाना और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। इस वार्ता पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की भी पूरी नजर रहेगी।
रूस के राष्ट्रपति के कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है, लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि मॉस्को आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है। शिखर सम्मेलन में पुतिन द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका के प्रयासों से अवगत कराए जाने की भी संभावना है। भारत लगातार कहता रहा है कि युद्ध खत्म करने का रास्ता केवल संवाद और कूटनीति से होकर गुजरता है।
शिखर सम्मेलन से पहले, दोनों देशों के रक्षा मंत्री व्यापक बैठक करेंगे। इसमें भारत द्वारा रूस से एस-400 मिसाइल प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य हार्डवेयर की अतिरिक्त खरीद योजना पर ध्यान केंद्रित होगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 प्रणाली की सफलता का हवाला देते हुए दोनों पक्ष रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान देंगे। पेस्कोव ने कहा है कि रूस द्वारा भारत को सुखोई-57 लड़ाकू विमान दिए जाने की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है। भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की एक खेप खरीदने की प्रक्रिया में है। डसॉल्ट एविएशन का राफेल, लॉकहीड मार्टिन का F-21, बोइंग का F/A-18 और यूरोफाइटर टाइफून इसके प्रमुख दावेदार हैं।
द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर भी बातचीत होगी। रूस ने भारत को कच्चे तेल पर अतिरिक्त छूट देने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम अमेरिका के नए प्रतिबंधों और हाल के सप्ताहों में भारत द्वारा रूसी तेल की कम खरीद के बीच आया है।
गौरतलब है कि भारत और रूस में बारी-बारी से 22 शिखर बैठकें हो चुकी हैं। पिछली बार पुतिन ने 2021 में नई दिल्ली का दौरा किया था। इसके बाद जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री मोदी ने मास्को का दौरा किया था।
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