अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने चार साल बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प दिया है। इसके पीछे रक्षा और गृह मंत्रालय के सामने रोजगार से जुड़ी कई चुनौतियां थीं। अर्धसैनिक बलों में आरक्षण लागू करने से लेकर भर्ती नियमों में बदलाव और हजारों अग्निवीरों के भविष्य की व्यवस्था करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था।
अग्निपथ योजना में बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह चार साल की सेवा पूरी करने के बाद सेना से बाहर होने वाले अग्निवीरों के भविष्य और रोजगार की व्यवस्था को लेकर सामने आ रही चुनौतियां मानी जा रही हैं। मूल योजना के तहत चार साल बाद 75 फीसदी अग्निवीरों को सेना से बाहर होना था। इनके लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और दूसरी सरकारी नौकरियों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर काम किया था।
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सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सामने अलग-अलग जिम्मेदारियां और चुनौतियां थीं। रक्षा मंत्रालय को तीनों सेनाओं की जरूरतों और अग्निवीरों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भर्ती व्यवस्था तय करनी थी, जबकि गृह मंत्रालय के सामने बाहर होने वाले अग्निवीरों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में समायोजित करने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी थी।
अग्निपथ योजना में बदलाव से पहले 5 बड़ी चुनौतियां
1. CAPF में 20 फीसदी आरक्षण लागू करने की चुनौती
चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होने वाले अग्निवीरों को रोजगार देने के लिए गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 20 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की थी। इसमें CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB जैसे बल शामिल हैं। हालांकि, सिर्फ आरक्षण की घोषणा करना पर्याप्त नहीं था। इसे जमीन पर लागू करने के लिए संबंधित बलों की भर्ती प्रक्रिया और नियमों में बदलाव करना भी जरूरी था।
2. मौजूदा भर्ती व्यवस्था और जवानों के हितों का संतुलन
सूत्रों के मुताबिक, इस आरक्षण व्यवस्था को लेकर कुछ स्तरों पर चिंताएं भी थीं। सवाल था कि अग्निवीरों को रोजगार के अतिरिक्त अवसर देने के साथ-साथ इन बलों में सामान्य भर्ती के जरिए आने वाले उम्मीदवारों के अवसरों को कैसे सुरक्षित रखा जाए। सरकार के सामने दोनों व्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती थी।
3. भर्ती नियमों में बदलाव के लिए सीमित समय
गृह मंत्रालय की योजना केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भर्ती नीति में जरूरी बदलाव की प्रक्रिया 31 मार्च 2027 तक पूरी करने की थी। वहीं, नौसेना के पहले बैच के अग्निवीरों की चार साल की सेवा 21 नवंबर 2026 को पूरी होने वाली थी। ऐसे में नई भर्ती व्यवस्था को समय पर लागू करना एक बड़ी चुनौती थी।
4. हजारों अग्निवीरों के भविष्य की चिंता
अग्निपथ योजना के पहले बैच के हजारों अग्निवीरों की चार साल की सेवा पूरी होने वाली थी। मूल व्यवस्था के तहत इनमें से केवल 25 फीसदी को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलना था, जबकि बाकी 75 फीसदी को सेना से बाहर होना था। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करना सरकार के सामने अहम सवाल था।
5. रक्षा और गृह मंत्रालय के बीच समन्वय की चुनौती
रक्षा मंत्रालय के सामने सेना की परिचालन जरूरतों, सैनिकों की संख्या और भर्ती व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी थी। वहीं, गृह मंत्रालय को बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए CAPF और अन्य सरकारी नौकरियों में अवसर उपलब्ध कराने थे। दोनों मंत्रालयों के सामने चुनौती थी कि सैन्य जरूरतों और अग्निवीरों के भविष्य के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए।
इन चुनौतियों के बीच सरकार ने अग्निपथ योजना में बदलाव करते हुए चार साल बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प देने का फैसला किया है। इस बदलाव के तहत अब अग्निवीरों के लिए सेना में नियमित होने का एक और अवसर तैयार किया गया है।
नई व्यवस्था में क्या होगा?
पहले चार साल: अग्निवीरों के पहले चार साल के कार्यकाल के बाद मेरिट और निर्धारित चयन मानकों के आधार पर 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित किया जाएगा।
अगले दो साल: बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा। इस दौरान उन्हें सेवा के लिए निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।
छह साल बाद: अतिरिक्त दो साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को उनकी इच्छा, शारीरिक फिटनेस, प्रदर्शन और निर्धारित चयन मानकों के आधार पर नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। इस दूसरे चरण में नियमित किए जाने वाले अग्निवीरों की संख्या पर पहले से कोई तय प्रतिशत सीमा नहीं रखी गई है।
सरकार की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, यह बदलाव तीनों सेनाओं की सिफारिशों और पिछले चार साल के अनुभव तथा प्रदर्शन के आकलन के बाद किया गया है। इस बदलाव से सरकार ने अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में शामिल होने का एक अतिरिक्त रास्ता दिया है। हालांकि, इसके साथ ही यह भी स्पष्ट है कि सभी अग्निवीरों का नियमित होना सुनिश्चित नहीं है। अंतिम चयन निर्धारित मानकों और सेना की जरूरतों के आधार पर ही होगा।
