NAMO Bharat News: नई 'रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम' (आरआरटीएस) रेलगाड़ियों को 'नमो भारत' के नाम से जाना जाएगा। 20 अक्टूबर, शुक्रवार को देश की पहली रैपिड रेल का इंतजार खत्म हो जाएगा। दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली रैपिड रेल के नाम से भी संशय हट गया है। मगर क्या आप जानते हैं कि वास्तव में 'नमो' शब्द का अर्थ क्या है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह घोषणा की है कि इन ट्रेनों को नमो भारत के नाम से जाना जाएगा।
सनातन धर्म के मंत्रों से संबंधित है 'नमो' शब्द
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 'नमो' घाट और अब दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली रैपिड रेल का नाम 'नमो भारत', क्या आप जानते हैं कि असल में नमो शब्द कहा से आया और इसका क्या अर्थ है, किससे संबंध है? हिंदू धर्म में नमो का मतलब भगवान से होता है। नमो शब्द को भगवान को नमस्कार के लिए उपयोग में लाया जाता है। यूं कहें कि नमो शब्द वास्तव में सनातन धर्म के मंत्रों से संबंधित है। अक्सर श्लोक और मंत्रोच्चारण के दौरान हम इस शब्द का इस्तेमाल करते हुए सुनते हैं।
राजनीति में नमो के क्या हैं मायने? समझिए
इन दिनों नमो शब्द की चर्चा सियासी गलियारों में जोरों से है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का संक्षिप्त रूप 'नमो' है। अगर ध्यान दें तो समझ सकते हैं कि 'न से नरेंद्र और मो से मोदी', दोनों मिलकर नरेंद्र मोदी शब्द बनता है। सियासत में इसे लेकर काफी बखेड़ा देखा जा चुका है। बनारस के खिड़किया का नाम नमो घाट रखने को लेकर भी राजनीतिक हलचल देखी गई थी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष अजय राय ने भी उस वक्त पीएम मोदी और भाजपा पर तंज कसा था।
हालांकि कई भाजपा नेताओं ने विपक्षी के तंज का जवाब भी दिया है। साल 2014 में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी इसका जिक्र किया था कि नमो का मतलब हिंदू धर्म में ईश्वर को नमस्कार करना होता है। विधानसभा में नमो का राग अलापने और ताने कसने पर उन्होंने उस वक्त विपक्षी नेताओं को जवाब दिया था।
आरआरटीएस के प्राथमिकता खंड का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को आरआरटीएस के प्राथमिकता खंड का उद्घाटन करेंगे। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस गलियारे का 17 किलोमीटर लंबा प्राथमिकता वाला खंड इसके उद्घाटन के एक दिन बाद 21 अक्टूबर को यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री पुरी ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में घोषणा की कि आरआरटीएस ट्रेन को ‘नमो भारत’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा, 'करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ी आरआरटीएस परियोजना का प्राथमिकता खंड रफ्तार भरने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 अक्टूबर को इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे। देश के रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को ‘नमो भारत’ के नाम से जाना जाएगा।'
पीएम मोदी ने आठ मार्च 2019 को रखी थी नींव
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बुधवार को बताया था कि मोदी भारत में आरआरटीएस की शुरुआत करते हुए साहिबाबाद और दुहाई डिपो को जोड़ने वाली एक रैपिडएक्स ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। पीएमओ ने बताया था कि दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस गलियारे का 17 किलोमीटर प्राथमिकता खंड गाजियाबाद, गुलधर और दुहाई स्टेशनों के जरिए साहिबाबाद को दुहाई डिपो से जोड़ेगा। बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने आठ मार्च 2019 को दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ गलियारे की नींव रखी थी। नए विश्व स्तरीय परिवहन बुनियादी ढांचे के निर्माण के जरिए देश में क्षेत्रीय संपर्क को बदलने की प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि के अनुसार आरआरटीएस परियोजना विकसित की जा रही है।
30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत
आरआरटीएस 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक नयी रेल आधारित, उच्च गति, उच्च आवृत्ति के साथ क्षेत्रीय यात्रा की सुविधा प्रदान करने वाली प्रणाली है। पीएमओ ने बताया है कि यह एक 'परिवर्तनकारी' क्षेत्रीय विकास पहल है, जिसमें अंतर शहरी आवागमन के लिए हर 15 मिनट में उच्च गति वाली ट्रेन उपलब्ध होगी और आवश्यकता के अनुसार यह हर पांच मिनट में भी उपलब्ध हो सकती है। उसने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कुल आठ आरआरटीएस गलियारे की पहचान की गयी है जिसमें पहले चरण में तीन गलियारों दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर और दिल्ली-पानीपत के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी गयी है। पीएमओ ने बताया कि दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ गलियारा 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया जा रहा है और यह गाजियाबाद, मुरादनगर तथा मोदीनगर शहरों के जरिए एक घंटे से भी कम समय में दिल्ली को मेरठ से जोड़ेगा।
