न स्टील, न कील… सिर्फ रस्सी और लकड़ी, पहली समुद्री यात्रा पर निकला INSV कौंडिन्य; जिंदा हुई 1500 साल पुरानी विरासत
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Dec 30, 2025, 12:55 PM IST
गुजरात के पोरबंदर से सोमवार को अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय समुद्री यात्रा पर ओमान के लिए रवाना हुआ आईएनएसवी कौंडिन्य पूरी तरह पारंपरिक सिलाई तकनीक से निर्मित है। इस पोत को पांचवीं शताब्दी के एक प्राचीन जहाज की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसकी प्रेरणा अजंता गुफाओं में बने एक ऐतिहासिक चित्र से ली गई है।
पहली समुद्री यात्रा पर निकला INSV कौंडिन्य। फोटो-PTI
भारत ने पांचवी सदी की प्राचीन सिलाई तकनीक से एक जहाज बनाया है। इस जहाज में न तो इंजन लगा है और न ही धातु की कोई चीज। लकड़ी से बना, नारियल के रेशों से सिला और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाता यह जहाज उस युग की याद दिलाता है, जब भारतीय नाविक समुद्र को चुनौती नहीं देते थे, बल्कि उसे अपना साथी मानते थे। सितारे उनकी दिशा बताते थे, हवाएं उनकी ताकत बनती थीं। इसे आज पूरी दुनिया आईएनएसवी कौंडिन्य के नाम से जान रही है। आज हम इसकी बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज का दिन भारतीय नौसेना के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। दरअसल, आज इस आईएनएसवी कौंडिन्य ने गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट का अपना पहला सफर शुरू किया है। यह यात्रा केवल एक भौगोलिक दूरी तय करने की शुरुआत नहीं है, बल्कि लगभग डेढ़ हजार साल पुराने उस समुद्री अध्याय को फिर से भी खोल रही है जिसे इतिहास में दफन कर दिया गया था।
पांचवीं शताब्दी के एक प्राचीन जहाज की तर्ज पर तैयार किया गया
गुजरात के पोरबंदर से सोमवार को अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय समुद्री यात्रा पर ओमान के लिए रवाना हुआ आईएनएसवी कौंडिन्य पूरी तरह पारंपरिक सिलाई तकनीक से निर्मित है। इस पोत को पांचवीं शताब्दी के एक प्राचीन जहाज की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसकी प्रेरणा अजंता गुफाओं में बने एक ऐतिहासिक चित्र से ली गई है।

अजंता गुफाओं में बने एक ऐतिहासिक चित्र से ली गई प्रेरणा। फोटो-PTI
पौराणिक नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है नाम
इस जहाज का नाम पौराणिक नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने प्राचीन काल में भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री यात्रा की थी। आईएनएसवी कौंडिन्य भारत की एक समुद्री राष्ट्र के रूप में समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और समुद्र के जरिए सांस्कृतिक संपर्कों का प्रतीक माना जा रहा है।
नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि इसके डिजाइन बनाना और निर्माण करने में भी काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। भारतीय नौसेना ने 21 मई को कारवार नौसैनिक अड्डे पर एक समारोह के दौरान केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में इस जहाज को औपचारिक रूप से कमीशन किया और इसका नाम भारतीय नौसेना नौकायन पोत (आईएनएसवी) कौंडिन्य रखा।

21 मई को कारवार में किया गया था कमीशन। फोटो-PTI
प्राचीन समुद्री मार्गों से तय करेगा रास्ता
यह जहाज सोमवार को गुजरात के पोरबंदर बंदरगाह से ओमान के लिए अपनी पहली समुद्री यात्रा पर निकला। इस यात्रा पर यह पोत उन्हीं प्राचीन समुद्री मार्गों से होकर गुजरेगा, जो कभी भारत के पश्चिमी तट को ओमान से जोड़ते थे और जिनके जरिए हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापार व सांस्कृतिक आदान-प्रदान संभव होता था।
मास्टर शिपराइट बाबू शंकरन ने किया निर्माण
पारंपरिक तकनीक से सिले गए इस जहाज के निर्माण की परियोजना जुलाई 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और होडी इनोवेशन्स के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत शुरू की गई थी। इस परियोजना का वित्तपोषण संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया। नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि सितंबर 2023 में मास्टर शिपराइट बाबू शंकरन के नेतृत्व में कुशल कारीगरों की एक टीम ने पारंपरिक सिलाई विधि से जहाज का निर्माण शुरू किया। कई महीनों तक लकड़ी की तख्तियों को नारियल की रेशमी रस्सियों, नारियल के रेशों और प्राकृतिक रेजिन की मदद से आपस में जोड़ा गया।

नारियल की रस्सियों और प्राकृतिक रेजिन से बनाया गया (फोटो- पीटीआई)
फरवरी 2025 में किया गया था लॉन्च
आईएनएसवी कौंडिन्य को फरवरी 2025 में गोवा स्थित होडी शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। लंबे समय तक चले निर्माण और तैयारियों के बाद 29 दिसंबर को पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने भारत में ओमान के राजदूत ईसा सालेह अल शिबनी की उपस्थिति में इस पर ध्वजारोहण किया।
पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पोरबंदर से मस्कट के लिए आईएनएसवी कौंडिन्य की पहली यात्रा शुरू होते देख उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा खाड़ी क्षेत्र और उससे आगे भारत के ऐतिहासिक संबंधों को फिर से जीवंत करेगी और चालक दल को सुरक्षित व यादगार यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
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