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चुनाव के बाद हिंसा मामला: 40 से ज्यादा मुकदमों को बंगाल के बाहर ट्रांसफर करने की याचिका पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, CBI को लगाई फटकार

Supreme Court: सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा मामले के 40 से ज्यादा मुकदमों को पश्चिम बंगाल के बाहर ट्रांसफर करने की मांग की थी। इस पर अदालत ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है और इसे अदालत की अवमानना का केस बताया है।

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सुप्रीम कोर्ट।

Photo : BCCL

Supreme Court: पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान एक याचिका पर अदालत ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा महौल बनाया जा रहा है कि जैसे पश्चिम बंगाल में न्यायपालिका दुश्मनीपूर्ण हो गई है। दरअसल, सीबीआई ने याचिका दायर कर चुनाव के बाद हिंसा मामले के 40 से ज्यादा मुकदमों को पश्चिम बंगाल के बाहर ट्रांसफर करने की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अदालत की अवमानना का मामला है। सीबीआई को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नहीं हो सकता कि आपके अधिकारी किसी विशेष राज्य को पसंद नहीं करते हैं। उन्हें इससे पूरे राज्य की न्यायपालिका पर आक्षेप लगाने की अनुमति नहीं मिलती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी याचिका के माध्यम से न्यायपालिक पर आक्षेप लगाते हुए निंदनीय आरोप लगा रही है।

नए सिरे से अर्जी दाखिल करने का आदेश

अदालत ने कहा कि आप याचिका में कह रहे हैं कि जज गलत तरीके से जमानत दे रहे हैं। इस तरह आप सभी अदालतों को कटघरों में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। आप जजों की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस पर सीबाआई की ओर से ASG एसवी राजू ने कहा कि ये अर्जी सही से ड्राफ्ट नहीं की गई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए नए सिरे से अर्जी दाखिल करने की इजाजत दी है।

क्या है मामला?

बता दें, पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा भड़की थी। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन घटनाओं की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई का कहना है कि राज्य का माहौल ठीक नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई के लिए मामलों को प्रदेश से बाहर भेजने की जरूरत है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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