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पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल जल्द, कुछ मंत्रियों का कट सकता है पत्ता

Mamata Banerjee Cabinet Reshuffle News: तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित फेरबदल मुख्य रूप से उन विभागों पर केंद्रित होगा जो सीधे तौर पर सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े हैं। सूत्रों के मुताबिक, कई मौजूदा मंत्रियों का पत्ता कट सकता है, उनकी जगह नए चेहरों को शामिल किया जाएगा।

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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी।

Mamata Banerjee Cabinet Reshuffle News: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में चरणबद्ध फेरबदल अगले साल की शुरुआत से शुरू होने की संभावना है और यह प्रक्रिया अगले दो से तीन महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित फेरबदल मुख्य रूप से उन विभागों पर केंद्रित होगा जो सीधे तौर पर सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव 2026 को ध्यान में रखते हुए इन विभागों के काम को बेहतर बनाना चाहती हैं।

इस फेरबदल के कुछ पहलू हो सकते हैं। पहला यह कि कुछ महत्वपूर्ण विभाग, जो सीधे तौर पर सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े हैं, उनका प्रबंधन कुछ मंत्रियों द्वारा किया जा रहा है, जो अन्य विभागों के भी प्रभारी हैं। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि मुख्यमंत्री उन महत्वपूर्ण विभागों के लिए एक-एक मंत्री को समर्पित करने पर विचार कर रही हैं, ताकि वहां कामकाज में सुधार हो सके। उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति में, कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किए जाने की काफी संभावना है।

कई मंत्रियों का कट सकता है पत्ता

फेरबदल का दूसरा हिस्सा कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों को आवश्यकताओं के अनुसार बदलना होगा। उस स्थिति में भी, पार्टी सूत्रों ने कहा कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के मंत्रालय चले जाएंगे और उनकी जगह नए चेहरे आ सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि तीसरा हिस्सा कुछ मौजूदा राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र) को कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत करना होगा।

अगस्त से चल रही फेरबदल की सुगबुगाहट

पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया, राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा इस साल अगस्त में शुरू हुई थी। अगर सब कुछ सही दिशा में चला तो अगले साल की शुरुआत से ही यह प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे, जिसमें पार्टी के मामलों, विधायी मामलों और प्रशासनिक मामलों को संभालने वाले व्यक्तियों की पहचान की गई थी। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था कि इन तीनों क्षेत्रों में "पुराने लोगों" को "नए लोगों" से ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की युवा और छात्र शाखा के मौजूदा नेतृत्व के कामकाज की समीक्षा करने का भी संकेत दिया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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