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बंगाल में लागू हुआ नया गुंडा-रोधी कानून, CM शुभेंदु बोले- TMC और वाम शासन की 'गुंडागर्दी' खत्म करके रहेंगे

'पश्चिम बंगाल जन-सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' को दो सप्ताह पहले विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया था। सोमवार से इसके प्रावधान पूरे राज्य में प्रभावी हो गए हैं।

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सुवेंदु अधिकारी

Photo : PTI

पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद से ही सीएम सुभेंदु अधिकारी ने असामाजिक तत्वों और हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है। इस बाबत बंगाल सरकार ने सोमवार से नया गुंडा-रोधी कानून लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे राज्य में सालों से जड़ें जमा चुके वामपंथी और तृणमूल शासन के दौरान पनपे गुंडाराज पर कार्रवाई का बड़ा हथियार बताया।

विधानसभा से पारित होने के दो सप्ताह बाद लागू हुआ कानून

'पश्चिम बंगाल जन-सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' को दो सप्ताह पहले विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया था। सोमवार से इसके प्रावधान पूरे राज्य में प्रभावी हो गए हैं। सुवेंदु सरकार का दावा है कि यह कानून संगठित अपराध, अवैध खनन, जबरन वसूली, साइबर अपराध, भूमि कब्जाने वाले गिरोहों और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद करेगा।

मुख्यमंत्री बोले- कानून व्यवस्था बहाल करना सरकार की प्राथमिकता

इस मौके पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 34 वर्षों के वाम शासन और 15 वर्षों के तृणमूल शासन के दौरान पनपे गुंडों से निपटने के लिए इस कानून की जरूरत थी। उन्होंने साफ किया कि कानून का उद्देश्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि अपराध और राजनीति के गठजोड़ को तोड़ना है।

बिना मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत का प्रावधान

इस कानून का सबसे चर्चित प्रावधान एहतियाती हिरासत से जुड़ा है। इसके तहत यदि प्रशासन को लगता है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है या संगठित अपराध की तैयारी कर रहा है, तो उसे बिना मुकदमे के अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।

जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी विशेष अधिकार

नए कानून के तहत जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे आदतन अपराधियों को किसी विशेष क्षेत्र या पूरे जिले से एक वर्ष तक के लिए बाहर रहने का आदेश जारी कर सकें।

गैर-जमानती होंगे अपराध, बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार

इस कानून के दायरे में आने वाले सभी अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी करने का अधिकार भी दिया गया है।इसके अलावा, संगठित अपराध, सिंडिकेट संचालन, जबरन वसूली, अवैध कब्जे और भूमि हड़पने जैसी गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों को कुर्क और जब्त करने का भी प्रावधान किया गया है।

विपक्ष ने जताई दुरुपयोग की आशंका

विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कानून में प्रशासन को मिले व्यापक अधिकारों के कारण इसके राजनीतिक इस्तेमाल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि इसका उपयोग केवल संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए किया जाएगा।
Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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