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'असम पुलिस ने दो बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ा', पश्चिम बंगाल CID ने बताया आतंकवादियों को पकड़ने के लिए कैसे चलाया अभियान

Nabbing Two Terrorists: असम पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल से दो आतंकवादियों को पकड़ने के अभियान पर पश्चिम बंगाल सीआईडी ​​प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कैसे इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। वहीं दूसरी ओर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया है कि असम पुलिस ने दो बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस खदेड़ा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

West Bengal CID PC on Assam Police’s Operation: पश्चिम बंगाल सीआईडी ने असम पुलिस द्वारा बंगाल से दो आतंकवादियों को पकड़ने के अभियान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। आईजी एसटीएफ गौरव शर्मा और एडीजी दक्षिण बंगाल सुप्रतिम सरकार ने टिप्पणी की है।

राज्य में स्लीपर सेल स्थापित कर रहे हैं कुछ आतंकवादी

उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल सीआईडी पीसीहमें कुछ इनपुट मिले थे कि बांग्लादेश के कुछ आतंकवादी राज्य में स्लीपर सेल स्थापित कर रहे हैं। राज्य एसटीएफ इस पर काम कर रही थी और असम पुलिस ने हमसे संपर्क किया और उनके पास भी इसी तरह की जानकारी थी। उन्हें मुर्शिदाबाद में एबीटी के एक स्लीपर सेल के बारे में जानकारी थी।'

गौरव शर्मा ने आगे बताया कि असम पुलिस और बंगाल पुलिस एसटीएफ की एक टीम ने ऑपरेशन चलाकर मुर्शिदाबाद के हरिहरपारा से दो लोगों को गिरफ्तार किया। बंगाल से दो, असम से पांच और केरल में एक व्यक्ति को पकड़ा गया है। ABT को कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। स्लीपर सेल को राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को संचालित करने के लिए युवाओं का ब्रेनवॉश करने के लिए पेश किया गया था और वे हथियार हासिल करना चाहते थे। वे चिकन नेक को निशाना बनाकर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित करना चाहते थे।

'असम पुलिस ने दो बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस खदेड़ा'

असम पुलिस ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे दो बांग्लादेशियों को वापस खदेड़ दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने यह जानकारी दी। हालांकि, सरमा ने यह नहीं बताया कि दोनों बांग्लादेशियों ने भारत में प्रवेश करने का प्रयास किस जिले से किया था।

सरमा ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक सराहनीय अभियान में असम पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के रूप में पहचाने गए दो व्यक्तियों को सफलतापूर्वक पकड़ लिया।" दोनों घुसपैठियों की पहचान ब्यूटी बेगम और जैस्मीन खातून के रूप में हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा, "दोनों को तुरंत सीमा पार वापस भेज दिया गया। टीम ने बहुत बढ़िया काम किया।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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