बंगाल में बीजेपी सरकार के आगमन के साथ तृणमूल कांग्रेस के भीतर कलह की स्थिति पैदा हो गई है। इसी बीच बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई मौजूदा सांसद और विधायक लगातार उनके संपर्क में हैं और भाजपा में शामिल होना चाहते हैं।
हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि फिलहाल इन नेताओं के लिए भाजपा के दरवाजे पूरी तरह बंद हैं और इन्हें पार्टी में शामिल नहीं कराया जाएगा। भट्टाचार्य ने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि किसी भी दागी या विवादित छवि वाले नेता को भाजपा में किसी भी कीमत पर 'नो एंट्री' रहेगी। पार्टी का यह फैसला साफ-सुथरी राजनीति को बढ़ावा देने और पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए अपनी राजनीतिक छवि को मजबूत बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
'बीजेपी को टीएमसी नेताओं की जरूरत नहीं'
शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि स्पष्ट जनादेश मिलने के बाद भाजपा पर अब अन्य दलों के नेताओं को शामिल करने का कोई दबाव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के बल पर जीत हासिल की है व चुनाव जीतने के लिए अब उसे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की आवश्यकता नहीं है।
'राजनीति में दो और दो हमेशा चार नहीं होते'
जब यह पूछा गया कि क्या भविष्य में पार्टी का रुख बदल सकता है तो भट्टाचार्य ने कहा कि राजनीति में दो और दो हमेशा चार नहीं होते, लेकिन किसी भी भ्रष्टाचार, नियुक्ति घोटाले या कथित गिरोह नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति के लिए पार्टी में जगह नहीं होगी। इस संबंध में कोई भी फैसला सामूहिक रूप से लिया जायेगा।
शमिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस को लेकर ‘अच्छी’ और ‘बुरी’ तृणमूल जैसी किसी अवधारणा को खारिज कर दिया. शमिक ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कोई वर्गीकरण नहीं किया।
मुस्लिमों से ‘अल्पसंख्यक मानसिकता’ छोड़ने की जरूरत: भट्टाचार्य
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मुस्लिमों को स्वयं को सबसे पहले देश और राज्य का नागरिक मानना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिले दो-तिहाई बहुमत ने यह साबित कर दिया है कि केवल अल्पसंख्यक वोटों पर निर्भर हुए बिना भी सरकार बनायी जा सकती है।
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