Women Quota: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के विशेष सत्र से पहले सोमवार को महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने सरकार पर महिला आरक्षण बिल को राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। खरगे ने कहा कि 15 अप्रैल को होने वाली सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर पार्टी की अगली रणनीति तय की जाएगी।
बेंगलुरू में पत्रकारों के साथ बातचीत में खरगे ने कहा कि हम नारी शक्ति बिल के खिलाफ नहीं हैं। मुझे (किरेन रिजिजू से) से एक पत्र मिला है, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक कारणों से ला रही है। हमने 15 तारीख को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें इस पर चर्चा कर आगे का फैसला लिया जाएगा। यह प्रस्ताव हमने अपने कार्यकाल में भी पेश किया था, इसलिए हम इसके विरोध में नहीं हैं।
'प्रस्तावित परिसीमन खतरनाक'
इससे पहले, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, ''पीएम मोदी विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं जिन्हें सरकार उस समय संसद के विशेष सत्र में पारित करना चाहती है, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। इस असाधारण तरीके की जल्दबाजी का केवल एक ही कारण हो सकता है, वह है राजनीतिक लाभ प्राप्त करना और विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाना।''
उन्होंने कहा कि असली मुद्दा परिसीमन का है जिसके बारे में अबतक अनौपचारिक रूप से जानकारी उपलब्ध है। यह बेहद खतरनाक और संविधान पर हमला है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विवाद
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2003 को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। जनगणना में देरी के चलते केंद्र सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है, जिसके तहत विधायिकाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित होंगी।
कब बुलाया गया संसद का विशेष सत्र?
संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से तीन दिनों के लिए बुलाया गया है, जिसमें इस अधिनियम में संशोधन और परिसीमन विधेयक पेश किया जाएगा।
लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी संभव
परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती हैं। ऐसे में महिला आरक्षण लागू करने के लिए इन दोनों विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के रूप में पारित करना जरूरी होगा। फिलहाल इस व्यवस्था में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं है, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए मौजूदा आरक्षण जारी रहेगा।
