Exclusive : अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी, जोश में सेना के जवान और भारतीय, गूंज उठा भारत माता की जय के नारे

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 15, 2022, 07:17 PM IST

Exclusive : अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी हो रही है। सेना के जवानों का जोश देखने लायक है। बॉर्डर पर भारत-पाकिस्तान के जवानों के शौर्य प्रदर्शन होता है। जानिए क्या है बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी ?

Exclusive : 15 अगस्त के खास मौके पर अटारी बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी हो रहा है। BSF के जवान पूरी तैयारी में है। इस खास कार्यक्रम के लिए लोगों का हुजूम पहुंच चुका है। लोगों में जबरदस्त उत्साह है। TIMES NOW नवभारत संवाददाता प्रदीप दत्ता भी अटारी बॉर्डर से हर तस्वीर दिखाई। अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी 15 अगस्त-26 जनवरी को मनाई जाती है।

बीएसएफ और पाक रेंजर्स शामिल होते हैं। BSF के जवान सेरेमनी में तिरंगा उतारते हैं। बॉर्डर पर भारत-पाकिस्तान के जवानों के शौर्य प्रदर्शन होता है। हर शाम में दोनों देशों के जवान ड्रिल करते हैं। जवानों के शक्ति प्रदर्शन की वजह से सेरेमनी की चर्चा होती है। बड़ी संख्या में लोग सेरेमनी देखने पहुंचते हैं।

बीटिंग रिट्रीट समारोह से ठीक पहले अटारी-वाघा सीमा पर बड़ी भीड़ जमा हो गई, देशभक्ति के गीत गाए, नृत्य किया और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया। बीटिंग रिट्रीट एक प्रतिष्ठित परंपरा है जिसमें दोनों देशों के राष्ट्रीय झंडे शाम ढलने से पहले सीमा पर उतारे जाते हैं।

अटारी बॉर्डर पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी का इतिहास

क्या है बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी ?

सेना की बैरक वापसी के प्रतीक में यह परंपरा होती है। बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी पूरी दुनिया में होती है। युद्ध के बाद सेना बैरक में वापस लौटती है। सेना की वापसी पर म्युजिकल समारोह होता है। इस कार्यक्रम को बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी कहते हैं। भारत में 1950 से बीटिंग द रिट्रीट की परंपरा है। 

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