पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में टीएमसी सांसद पर हमले के बाद सियासत तेज हो गई है।हमले के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने खुद को राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए राजनीतिक हिंसा का सहारा लिया जा रहा है।
राहुल-अखिलेश और हेमंत का जताया आभार
रविवार को सोशल मीडिया पर जारी संदेश में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आज मैं राजनीतिक हिंसा और राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार बनकर खड़ा हूं। उन्होंने घटना के बाद चिंता जताने और समर्थन देने के लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और हेमंत सोरेन का आभार भी व्यक्त किया।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्षी दल एकजुट हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर आप उनका समर्थन करते हैं तो आप देशभक्त कहलाते हैं, लेकिन अगर आप सवाल पूछते हैं तो आप निशाना बन जाते हैं।
'सोनारपुर में जो हुआ वो विपक्ष को डराने की एक सुनियोजित कोशिश'
टीएमसी नेता ने दावा किया कि सोनारपुर में जो कुछ हुआ वह कुछ असामाजिक तत्वों की हरकत नहीं थी, बल्कि विपक्ष को डराने की एक सुनियोजित कोशिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा वापस ली गई, पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं किया गया और हिंसक तत्वों को खुली छूट दी गई।
'सत्ता अस्थायी बस जनता की इच्छा स्थायी होती है'
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए किसी भी तरह की धमकी का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता अस्थायी होती है, लेकिन जनता की इच्छा स्थायी होती है। मैं केवल जनता के सामने झुकूंगा,सत्ता में बैठे लोगों के सामने नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को कमजोर करने और समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और डर तथा हिंसा की राजनीति को हराने के लिए विपक्ष एकजुट रहेगा।
सोनारपुर में क्या हुआ था?
शनिवार को सोनारपुर में कथित चुनाव बाद हिंसा के एक पीड़ित के घर जाने के दौरान अभिषेक बनर्जी पर कुछ लोगों ने पत्थर और अंडे फेंके थे। घटना के बाद उन्होंने दावा किया था कि भाजपा कार्यकर्ता उन्हें जान से मारने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने उनके काफिले को घेर लिया था और पत्थर, अंडे तथा अन्य वस्तुएं फेंकी थीं। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ लोगों ने कथित तौर पर उनके साथ हाथापाई की कोशिश की। सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें सुरक्षित निकाला। हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाया गया था। दो निजी अस्पतालों में प्राथमिक उपचार दिया गया। हालांकि मेडिकल जांच में कोई गंभीर चोट नहीं मिलने के कारण उन्हें भर्ती नहीं किया गया।
