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Uttarakhand Tunnel: एक साथ 2 योजनाओं पर काम, वर्टिकल के साथ-साथ मैन्यूअल ड्रिलिंग शुरू; सेना ने संभाला मोर्चा

  • Edited by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Nov 26, 2023, 07:34 PM IST

Uttarakhand Tunnel: भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के एक इंजीनियर ग्रुप- मद्रास सैपर्स की एक इकाई को उत्तरकाशी की सिल्कयारा सुरंग में उस स्थान पर मैनुअल ड्रिलिंग के लिए बुलाया गया है, जहां पिछले 15 दिनों से 41 श्रमिक फंसे हुए हैं।

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सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू

Photo : ANI

Uttarakhand Tunnel: उत्तराखंड की सुरंग में फंसे मजदूरों के लिए अब एक साथ दो योजनाओं पर काम शुरू हो गया है। उत्तरकाशी की सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए वर्टिकल और मैन्यूअल दोनों ड्रिलिंग शुरू हो गई है। मैन्यूअल ड्रिलिंग के लिए सेना को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सेना के इंजीनियर्स ने संभाला मोर्चा

भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के एक इंजीनियर ग्रुप- मद्रास सैपर्स की एक इकाई को उत्तरकाशी की सिल्कयारा सुरंग में उस स्थान पर मैनुअल ड्रिलिंग के लिए बुलाया गया है, जहां पिछले 15 दिनों से 41 श्रमिक फंसे हुए हैं। बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए इंजीनियर रेजिमेंट के 30 जवान मौके पर पहुंच गए हैं। मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर सुरंग के अंदर रैट बोरिंग करेगी। एक अधिकारी ने कहा- "मैनुअल ड्रिलिंग करने के लिए, भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर हाथ, हथौड़े और छेनी जैसे हथियारों से सुरंग के अंदर के मलबे को खोदेगी और फिर पाइप को पाइप के अंदर बने प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाया जाएगा।"

कितना लगेगा समय

एक अधिकारी ने बताया कि अगर शाम तक अमेरिकन ऑगर मशीन को प्लाज्मा कटर के जरिए पाइपलाइन से हटा दिया जाए तो सुरंग का काम 15 घंटे में पूरा हो सकता है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि बचाव अभियान में जुटी रेस्क्यू टीम ने अब तय किया है कि मैनुअल ड्रिलिंग के जरिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खुदाई करके पाइपलाइन को आगे भेजा जाएगा। उन्होंने कहा- "अगर इस प्रक्रिया में कोई रुकावट आती भी है तो उस समस्या को मैन्युअल रूप से हल किया जाएगा और पाइपलाइन को कुछ दूरी तक आगे भेजा जाएगा।"

वर्टिकल ड्रिलिंग भी जारी

एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सुरग में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए सभी प्रयास जारी हैं। हसनैन ने कहा कि दूसरा सबसे अच्छा विकल्प माने जाने वाली वर्टिकल ड्रिलिंग का काम दोपहर के आसपास शुरू हुआ और 15 मीटर की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 86 मीटर की वर्टिकल ड्रिलिंग के बाद फंसे हुए श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए सुरंग की ऊपरी परत को तोड़ना होगा।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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